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नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को कैसे करें प्रसन्न? जानिए सही मंत्र, भोग और पूजा विधि

MADHVI TANWAR · 8 अक्टूबर 2026
navratri 2026

Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में नवरात्रि का खास महत्व होता है। इस बार नवरात्रि 11 अक्तूबर यानी रविवार से शुरू होने वाले हैं। भगवती के 9 स्वरूपों की आराधना के लिए प्रत्येक भक्त पूरी आस्था से नवरात्रि के व्रत रखता है। घर के मंदिर में कलश स्थापित कर कुछ लोग अखंड ज्योत जलाते हैं। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा के कुछ नियम होते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घर के मंदिर या चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर कलश की स्थापना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं मां के 9 स्वरूपों की खासियत और किस मंत्र के माध्यम से खास भोग लागकर उन्हें प्रसन्न किया जाए, तो चलिए आज हम आपको मां भगवती के 9 स्वरूपों की विशेषता और मंत्रों के साथ 9 विशेष भोग?

कैसे करें कलश स्थापना?

नवरात्रि का प्रथम दिन सबसे खास होता है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 तक रहेगा। इस बार शुभ मुहूर्त काफी जल्दी शुरू होगा। स्नान कर सबसे पहले एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर कुल कलश में जल, आम/अशोक के पत्ते और नारियल रखें। दीपक और अखंड जोत जलाने के लिए सुबह और शाम गाय के देसी घी का दीया जलाएं। पूरे 9 दिन की अखंड ज्योति के लिए यही घी इस्तेमाल में लें। मां को जल के छींटे देकर सबसे पहले स्नान कराएं। रोली, चंदन और अक्षत से मां का तिलक करें।

लाल फूलों से प्रसन्न होती है मां भगवती

मां को लाल पुष्प सबसे ज्यादा पसंद है। इसलिए गुलाब या गुडहल के फूलों से बनी माला मां भगवती को अर्पित करें। भोग के लिए फल, पान-सुपारी पूजा स्थान में रखे। मां को नैवेद्य का भोग लगाएं। मंत्र जाप और आरती के साथ-साथ दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। अंत में मां की आरती के लिए कपूर या दीये का इस्तेमाल करें। कन्या पूजन के दिन मां को हलवा-पूरी का भोग अर्पित करें।

9 दिन और मां के 9 स्वरूपों को जानिए कैसे करें प्रसन्न?

पहला दिन – मां शैलपुत्री

• मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
• भोग: देसी घी और सफेद रंग की मिठाइयां
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है। भक्त मां को फूल, फल, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करते हैं। इस दिन से कई लोग नौ दिनों के व्रत की शुरुआत भी करते हैं।

दूसरा दिन – मां ब्रह्मचारिणी

• मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
• भोग: शक्कर, पंचामृत या मिश्री का भोग
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता में की पूजा की जाती है। भक्त मां को फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोग अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन विशेष उनका स्वरूप तप और साधना का प्रतीक माना जाता है। भक्त पूजा के साथ मां की आरती और मंत्र जाप करते हैं

तीसरा दिन – मां चंद्रघंटा

• मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
• भोग: खीर या दूध से बनी मिठाई
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। उनका स्वरूप शक्ति और साहस से जुड़ा माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से मां को फूल और भोग अर्पित करके आरती की जाती है।

चौथा दिन – मां कूष्माण्डा

• मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
• भोग: मालपुआ या पीठे का भोग
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। भक्त मां को फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोग अर्पित करते हैं। कई स्थानों पर इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन भी होते हैं।

5वां दिन – मां स्कंदमाता

• मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
• भोग: केले का भोग
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। भक्त परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना के साथ मां की आराधना करते हैं।

छठा दिन – मां कात्यायनी

• मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
• भोग: शहद या मीठा पान
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मंदिरों और घरों में विशेष आरती और भोग की परंपरा रहती है। इस दिन भी व्रत रखने वाले भक्त सात्विक आहार लेते हैं।

सातवां दिन – मां कालरात्रि

• मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
• भोग: गुड़ का नैवेद्य
सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा होती है। धार्मिक परंपरा में मां को शक्ति और नकारात्मकता के नाश से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन विशेष पूजा और आरती की जाती है।

आठवां दिन – मां महागौरी

• मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
• भोग: नारियल या हलवा-पूरी
अष्टमी को मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इसी दिन कन्या पूजन किया जाता है। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है।

9वां दिन – मां सिद्धिदात्री

• मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
• भोग: खीर, पूरी और चने का प्रसाद
नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। कई जगह इस दिन नवमी हवन, विशेष आरती और कन्या पूजन किया जाता है। इसके बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है।इसके अलावा मां के आगे सूखे मेवे, मिश्री, बताशे, लौंग, इलायची, पान के पत्ते, शहद, दूध और दही भी पूजा में उपयोग किए जाते हैं।

मां दुर्गा के लिए श्रृंगार

कुछ परिवार नवरात्रि पर मां को सोलह श्रृंगार अर्पित करता है। इसमें आमतौर पर लाल चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी और आलता, साथ ही एक छोटा दर्पण और कंघी होती है। पूजा की दुकानों में तैयार श्रृंगार सेट भी मिलते हैं। जिससे समय की बचत होती है।

 

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