Explainer: हाथी, शेर या बैल! मां दुर्गा के आगमन और विदाई की सवारी का क्या है महत्व?
शारदीय नवरात्रि का इंतजार आखिरकार खत्म होने वाला है। 11 अक्तूबर से नवरात्रि का आरंभ होने वाला है। इस बार के शारदीय नवरात्रि बेहद खास होने वाले हैं। हर बार की तरह इस बार भी मां भगवती के आगमन की सवारी को लेकर लोगों के जहन में काफी सवाल उठ रहे हैं। कि आखिर मां भगवती इस बार किसकी सवारी के साथ आने वाली है। ज्योतिष में मां के वाहन को लेकर कई सवाल उठते हैं। हाथी, डोली या फिर शेयर मां की सवारी से ग्रह नक्षत्रों तक पर प्रभाव देखा जाता है। मां की सवारी ही शुभ-अशुभ परिणाम लेकर आती है। तो चलिए आपको बताते हैं इस बार मां भगवती की सवारी की क्या होगी खासियत, और कैसा देंगी परिणाम?
नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को कैसे करें प्रसन्न? जानिए सही मंत्र, भोग और पूजा विधि
शुभ और अशुभ संकेत
नवरात्रि पर 9 दिनों के लिए मां दुर्गा का आगमन होने वाला है। जितना महत्व नवरात्रि पर तिथियों और अमृतकाल व शुभ मुहूर्त का होता है। उससे भी कई ज्यादा महत्वपूर्ण होती है मां भगवती की सवारी। जी हां 9 दिन तक लगातार पूजा अर्चना कर मां को व्रत रखने वाला साधक मां को प्रसन्न करने के लिए जप-तप करता है। ज्योतिषियों के मुताबिक देवी के आगमन और प्रस्थान वाली सवारी हमेशा लोगों के लिए शुभ और अशुभ प्रभाव लेकर आती है। क्योंकि मां की सवारी से शुभ व अशुभ संकेत मिलते हैं। जो किसी भी शख्स के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
होती है धार्मिक मान्यता
नवरात्रि का दिन व वार सवारी के आगमन को निर्धारित करता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि रविवार से प्रारंभ होंगे। रविवार से नवरात्रि का शुरू होने का सीधा अर्थ है मां भगवती इस शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी। धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से मां भगवती हाथी पर सवार होकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आएंगी। भारतीय परंपरा के हिसाब से हाथी को यश, वैभव, संपदा, शक्ति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए देवी का आगमन हाथी पर सवार होना एक शुभ संकेत माना जा रहा है। ज्योतिष के मुताबिक इससे अच्छी वर्षा और खेती के बेहतरीन संकेत मिलते हैं।
मुर्गे पर माता का प्रस्थान
नवरात्रि के अगले दिन यानी 20 अक्तूबर 2026 को विजयादशमी है। दशहरा इस बार मंगलवार को है, ऐसे में मंगवार के हिसाब से ही देवी मां के प्रस्थान की सवारी निर्धारित है। मान्यता के हिसाब से मंगलवार या शनिवार को देवी अगर प्रस्थान करती हैं, तो चरणायुध अर्थात मुर्गे की सवारी निर्धारित है। इस बार मां भगवती की विदाई मुर्गे पर होने वाली है। धार्मिक व ज्योतिष के अनुसार देवी की मुर्गे पर विदाई शुभ नहीं होती है। यह काफी चुनौतियां और सामाजिक अशांति देकर जाती है।
वाहनों की धार्मिक मान्यताएं
नवरात्र में मां के आगमन की सवारी हाथी के अलावा घोड़े, नौका और डोली जैसे वाहनों की अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। किस वर्ष देवी की कौन सी सवारी होगी। यह नवरात्र की शुरुआत और समापन दिवस पर पड़ने वाले वार के आधार पर तय मानी जाती है। इसी के आधार पर यह भी तय माना जाता है, कि भविष्य में क्या घटनाएं होने वाली हैं और इसका मनुष्य पर कैसा प्रभाव रहेगा।
विजयादशमी के दिन विदाई का महत्व?
भागवत महापुराण के एक श्लोक में नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन किस वाहन से होगा और किस वाहन से मां वापस प्रस्थान करेंगी इसकी जानकारी है। नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन और विदाई के वाहन की मान्यता कलश स्थापना की तरह मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से सप्ताह के अलग-अलग दिनों पर माता के वाहन तय होते हैं। इन्हें शुभ-अशुभ संकेतों और आने वाले समय की परिस्थितियों से देखा जाता है।
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे.
गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥
मां भगवती के आगमन के वाहन का विशेष जितनी महत्व रखती है, उसी तरह माता के प्रस्थान के वाहन का भी काफी ज्यादा महत्व होता है। श्रीमद देवी भागवत पुराण के श्लोक में भी इस बात को बताया गया है कि विजयादशमी का पर्व किस वार को है और उसी वार यानी दिन के हिसाब से माता का वाहन तय होता है। माता दुर्गा का पारंपरिक स्थायी वाहन सिंह है। नवरात्रि में आगमन और विदाई के लिए बताए जाने वाले वाहन अलग धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
शशिसूर्यदिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा.
शनिभौमदिने यदि सा विजया चरणायुधयानकरी विकला॥
बुधशुक्रदिने यदि सा विजया गजवाहनगा शुभवृष्टिकरा.
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहनगा शुभसौख्यकरा॥
यह भी पढ़ें: नवरात्रि में कलश स्थापना का क्या है शुभ मुहूर्त? जानिए नारियल रखने की सही विधि और सही नियम