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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की मौत का मामला: मेडिको-लीगल केस दर्ज, पणजी पुलिस करेगी जांच

MADHVI TANWAR · 9 अक्टूबर 2026
nana patekar death

nana patekar death: बॉलीवुड के दिग्गज और प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का कल आकस्मिक निधन हो गया। क्योंकि मामला हाई प्रोफाइल हस्ती से जुड़ा है। ऐसे में मामले में गंभीरता दिखाते हुए गोवा के मणिपाल अस्पताल द्वारा एक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज कराया गया है। पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत (UD) का मामला दर्ज किया है।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 76 साल के एक्टर को डोना पाउला के ओशन पार्क स्थित उनके घर से बांबोलिम के मणिपाल हॉस्पिटल के कैजुअल्टी वार्ड में मृत अवस्था में लाया गया था। PSI नितिन नाइक की देखरेख में इस मामले की आगे की जांच चल रही है।

दिल का दौरा पड़ने से हुई थी मौत

पणजी पुलिस ने इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत (Unnatural Death) का मामला दर्ज किया है। एमएलसी दर्ज करने का मतलब यह नहीं है कि मौत में किसी साजिश का शक है; यह अस्पताल के बाहर हुई मौत और आधिकारिक दस्तावेज तैयार करने की एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है।

नाना पाटेकर का निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की। मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने इसकी पुष्टि की।

पोस्टमार्टम हुआ

8 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 5:10 से 5:30 बजे के बीच गोवा के डोना पाला स्थित अपने घर पर थे। मणिपाल अस्पताल के डॉक्टर शेखर सालकर ने इस बारे में कहा कि नाना पाटेकर जी को सुबह करीब 4:20-4:30 बजे अस्पताल लाया गया था और करीब 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

मौत के सही कारणों की आधिकारिक पुष्टि के लिए शव को पोस्टमार्टम के वास्ते गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा। नाना पाटेकर को पुणे में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित अभिनेताओं में से एक को दी गई एक भावपूर्ण विदाई थी।

क्यों पड़ती है मेडिको-लीगल केस की जरूरत

दरअसल अस्पताल प्रशासन के सामने कई बार ऐसी स्थिति खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में अस्पताल कानूनी नियमों के मुताबिक एमएलसी दर्ज करते हैं, जिससे मौत की परिस्थितियों और कारण का एक आधिकारिक दस्तावेज तैयार किया जा सके। इसमें व्यक्ति की बीमारी, चोट या मौत से जुड़े तथ्यों की कानूनी जांच की जरूरत पड़ सकती है। अस्पाल मरीज के इतिहास पहुंचने की हालत और इलाज संबंधी दस्तावेज रखते हैं। मौत के बाद शव कानूनी तरीके से संरक्षित रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर पोस्टमार्टम कराया जाता है।

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