Explainer: भारत की रक्षा शक्ति में इजाफा! मिशन 'सुदर्शन चक्र' को मिला Nagastra-1R, जानिए खासियत?
Nagastra-1R: सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को 450 नागास्त्रा 1आर (Nagastra 1R) स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन्स (कामिकेज ड्रोन) की सबसे बड़ी एकल खेप की आपूर्ति कर दी है। कंपनी ने इसे अपनी सबसे बड़ी सिंगल-बैच आपूर्ति बताया है। कंपनी के मुताबिक सेना ने कड़े परीक्षणों के बाद आपातकालीन खरीद के तहत यह ऑर्डर दिया। पिछले साल मार्च में हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल (एसएफटीएस) में चार कंपनियों ने तकनीकी परीक्षणों में भाग लिया था। लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने के लिए कई लाइव परीक्षणों के माध्यम से सिस्टम के प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया गया।
लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में महारथ
नागास्त्रा 1आर वेरिएंट को सेना की अल्प दूरी की सैन्य अभियानों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया था। कंपनी ने बताया कि इस प्रणाली के जरिए आत्मघाती हमले को रोकने में सफलता मिलगी। इसके जरिए बड़े हमले को रोका जा सकता है। इसके साथ ही गोला-बारूद का कहा विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। वह भी इसके जरिए पता लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं यह लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने के आकलन के साथ कई लाइव परीक्षणों के जरिए सिस्टम के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में आसानी होगी।
कंपनी ने स्वदेशी रूप से विकसित इस प्रणाली को सेना के लिए एक किफायती समाधान बताया। व्यापक सुरक्षा संदर्भ के तौर पर ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष का हवाला दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रणाली सटीकता या गुणवत्ता से समझौता किए बिना यह क्षमता प्रदान करती है। लोइटरिंग मुनिशन्स को किसी लक्ष्य पर हमला करने से पहले एक निर्दिष्ट क्षेत्र में हवा में बने रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है। एबॉर्ट-एंड-रिकवरी क्षमताओं वाले सिस्टम विशिष्ट परिचालन स्थितियों के तहत हमले को रोकने का विकल्प भी प्रदान कर सकते हैं।
वायु रक्षा प्रणाली के विकास का मार्ग होगा प्रशस्त
जून 2025 में भारतीय सेना ने 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग मुनिशन्स को खरीद का आदेश दिया था। जुलाई 2026 में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल ने स्वदेशी ड्रोन-रोधी प्रणाली 'भार्गवस्त्र' पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक साल 2030 तक "सुदर्शन चक्र" वायु रक्षा प्रणाली के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस प्रणाली का रडार 10 किलोमीटर तक की हवाई धमकियों का पता लगा सकता है, जबकि इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (ईओटीएस) की रेंज 6 किलोमीटर है। जो सेना की वर्तमान परिचालन आवश्यकता 2.5 किलोमीटर से काफी ज्यादा है।
15 अगस्त 2025 को हुआ था मिशन सुदर्शन चक्र का ऐलान
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को मिशन सुदर्शन चक्र का ऐलान किया था। उन्होंने इसे बड़ा स्वदेशी एयर डिफेंस प्रोग्राम बताया था। साल 2035 तक पूरे देश में सुरक्षा कवच बनाना इसका मकसद है। इस प्रोजेक्ट को भारत के अपने हाईटेक एयर डिफेंस अंब्रेला के तौर पर देखा जा रहा है जो दुश्मन की मिसाइलों, ड्रोन और एयरक्राफ्ट को गंभीर खतरा पैदा करने से पहले ही खत्म कर सकता है। भारत का सुदर्शन चक्र सिस्टम अब Nagastra 1R के शामिल होने के बाद और भी ज्यादा एडवांस हो गया है।
तो चलिए बताते हैं इसकी खासियत
Nagastra 1R की खासियत 5 किलोमीटर तक के दायरे में मौजूद और चुनिंदा ऑटोनॉमस मोड में ज्यादा दूरी तक के लक्ष्यों को सटीकता से अपना निशाना बनाएगी। यह हवा में लक्ष्य के ऊपर कुछ देर मंडराने और जरूरत पड़ने पर दुश्मन से टकराकर उसका खात्मा करने में सक्षम आत्मघाती ड्रोन है। इसमें मिशन को बीच में रद्द करने और ड्रोन को सुरक्षित वापस रिकवर करने की तकनीक क्षमता है। यह इलेक्ट्रिक से चलने वाला फिक्सड-विंग ड्रोन है जो लगभग 1 घंटे तक हवा में रह सकता है। इस पूरी खेप को 'मेक इन इंडिया' के तहत नागपुर स्थित सोलर ग्रुप की कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करती है।
अपने लक्ष्यों को भेदने के लिए किया है खास डिजाइन
सेना के अल्प-श्रेणी आत्मघाती हमले के लिए Nagastra 1R को बनाया है। यह 5 किलोमीटर के दायरे में अपने लक्ष्य को भेद सकता है। नागास्त्र के एक पुराने संस्करण को भी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तैनात किया था। जहां इसने लंबी दूरी के लक्ष्यों को भेदा था। 1 किलोग्राम के वारहेड से लैस, 1R मिसाइल को सैनिकों और वाहनों जैसे नरम चमड़ी वाले लक्ष्यों को भेदने के लिए खास डिजाइन किया गया है। इसमें दिन और रात निगरानी में कैमरे लगे हुए हैं। रात में होने वाले हमले और जीपीएस-निर्देशित नेविगेशन का इस्तेमाल हुआ है।
4 कंपनियों की टीम परीक्षणों में हुई थी शामिल
इसमें 2 मीटर की सीईपी है। नागास्त्र श्रृंखला के 5 संस्करणों में से, 1R अपनी कम ध्वनिक विशेषता के कारण 200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर भी पता नहीं चल पाती है। एसडीएएल के मुताबिक अगर लक्ष्य का पता नहीं लगाया जा सकता है तो यह हमले को रद्द कर नियंत्रण स्टेशन पर वापस लौट सकता है।
सेना ने जांच के बाद इसकी आपातकालीन खरीद का ऑर्डर दिया। साल 2025 के मार्च महीने में हिमाचल प्रदेश के बकलोह में स्थित स्पेशल फोर्सेज ट्रेनिंग स्कूल में 4 कंपनियों ने इसकी तकनीकी जांच में अपनी भूमिका निभाई। लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने के लिए कई लाइव परीक्षणों के माध्यम से सिस्टम के प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया गया।
40 मिनट है मारक क्षमता
नागास्ट्रा की मारक क्षमता 10 किलोमीटर तक है और इसकी मारक क्षमता 40 मिनट है, जो आवश्यक मानकों से दोगुनी है। स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक, स्वायत्त मोड में इसकी मारक क्षमता 15 किलोमीटर तक है। यह एक पोर्टेबल सिस्टम है, जिसका वजन 30 किलोग्राम है, जिसमें ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन, संचार नियंत्रण और न्यूमेटिक लॉन्चर शामिल हैं। सोलर ग्रुप के अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल का कहना है कि नागास्त्रा 1 आर में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसे बेंगलुरु स्थित जेड मोशन ऑटोनॉमस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से डिजाइन किया गया है।
अब लंबी दूरी के ड्रोन पर चल रहा है काम
कंपनी आगामी दिनों में इसके प्रमुख घटक, मोटर्स के स्वदेशीकरण की प्रक्रिया में है। एसडीएएल 50 किलोग्राम तक के वारहेड ले जाने वाले कलशास्त्र श्रृंखला के लंबी दूरी के ड्रोनों पर काम कर रही है। कंपनी मशीनीकृत पैदल सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले पैदल सेना लड़ाकू वाहनों पर तैनात किए जाने के लिए डिज़ाइन की गई ट्यूब-लॉन्च प्रणाली, कैनिस्टर लॉन्च्ड एंटी-आर्मर लॉइटरिंग मुनिशन्स (सीएएलएम) के शीतकालीन परीक्षणों की तैयारी भी कर रही है।
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