एमजे अकबर ने अफगानिस्तान के खिलाफ इस्लामाबाद की कार्रवाई पर साधा निशाना
नई दिल्ली: पूर्व विदेश राज्य मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर इस्लामाबाद पर तीखी टिप्पणी की है। अकबर ने कहा कि पाकिस्तान की प्रकृति में युद्ध “स्थानिक” यानी लगातार बना रहने वाला हो गया है और वह किसी समस्या का समाधान युद्ध के अलावा किसी अन्य तरीके से सोच नहीं पाता।
अकबर ने कहा कि मामला अब केवल भारत के साथ तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी संघर्ष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “यह केवल भारत के साथ नहीं है; अब यह अफगानिस्तान के साथ भी है।”
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई
अकबर की यह टिप्पणी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती शत्रुता के बीच आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने गुरुवार को अफगानिस्तान में 10 स्थानों पर हवाई हमले किए। इस्लामाबाद ने दावा किया कि इन स्थानों का संबंध अफगान क्षेत्र से किए गए ड्रोन हमलों से था।
वहीं, काबुल ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई में कम से कम चार नागरिक मारे गए।
पाकिस्तान ने अपने नवीनतम हमलों को अफगानिस्तान से कथित ड्रोन घुसपैठ के जवाब में की गई आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने हमलों की निंदा करते हुए “उचित जवाब” देने की बात कही है।
‘तालिबान पाकिस्तान की देन था’
एमजे अकबर ने पाकिस्तान और तालिबान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि तालिबान पाकिस्तान की बनाई हुई ताकत थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तालिबान सरकार वाले अफगानिस्तान के साथ ही पाकिस्तान को युद्ध करना पड़ रहा है, तो ऐसी स्थिति में इस्लामाबाद के पास अपने सैन्य कदमों को सही ठहराने का क्या आधार बचता है।
अकबर ने कहा कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष अब केवल कभी-कभार होने वाली झड़पों तक सीमित नहीं रहा है। उनके मुताबिक, यह लगातार चलने वाले संघर्ष का रूप लेता जा रहा है, जिसमें हवाई हमलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल भी हो रहा है।
सऊदी अरब और हूती संघर्ष का भी किया जिक्र
एमजे अकबर ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव को सऊदी अरब और यमन के हूती आंदोलन के बीच चल रहे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष से भी जोड़कर देखा।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति बन सकती है जहां पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ मदद के लिए सऊदी अरब से मक्का समझौते के तहत सहायता मांग सकता है, जबकि इसके उलट सऊदी अरब सामान्य परिस्थितियों में हूतियों के खिलाफ पाकिस्तान से मदद मांग सकता है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के पक्षकार हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि सऊदी अरब को बिना उकसावे के आक्रमण का सामना करना पड़ता है या संघर्ष का असर वहां तक फैलता है, तो समझौते को लागू करने या उसके प्रावधानों का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है।
‘दो समानांतर संघर्ष एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं’
अकबर ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान और हूती-सऊदी तनाव को दो समानांतर संघर्षों के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि गणितीय समानांतर रेखाओं के विपरीत आशंका यह है कि ये दोनों संघर्ष आगे चलकर एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा, ड्रोन हमलों और सैन्य कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और क्षेत्रीय स्तर पर इसके व्यापक प्रभाव को लेकर भी चर्चा जारी है।
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