मेरठ के 16 हजार से ज्यादा मकानों पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने खाली कराकर सील करने को कहा
Meerut Illegal Construction: मेरठ में अवैध निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शहर के जोन-A में चिन्हित 16,726 अवैध और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सबसे पहले इन परिसरों को खाली कराया जाए और फिर उन्हें सील किया जाए। साथ ही, अवैध निर्माणों के खिलाफ आगे की ध्वस्तीकरण कार्रवाई भी की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की स्थिति रिपोर्ट पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। कोर्ट के मुताबिक अगर जर्जर या अवैध निर्माण गिरने से किसी की जान जाती है तो संबंधित सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
जोन-A में मिले 16,726 अनधिकृत निर्माण
मेरठ में अवैध निर्माण की स्थिति जानने के लिए शहर को चार हिस्सों- जोन-A, B, C और D में बांटकर सर्वे कराया गया था। जोन-A में सर्वे के लिए 16 टीमें लगाई गई थीं।रिपोर्ट में सामने आया कि इस जोन में कुल 16,726 निर्माण पूरी तरह अवैध या अनधिकृत पाए गए। इनमें 12,907 आवासीय निर्माण हैं, जबकि 874 निर्माणों का इस्तेमाल आवासीय और गैर-आवासीय दोनों रूप में हो रहा है। इसके अलावा 2,945 गैर-आवासीय निर्माण भी चिन्हित किए गए हैं।
पहले खाली कराएं, फिर सीलिंग
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इन निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का पहला चरण उन्हें खाली कराना और सील करना होगा। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को इस प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का निर्देश दिया है।अदालत ने यह भी माना कि कुछ निर्माण बेहद जर्जर हालत में हो सकते हैं। ऐसे भवन अगर अचानक गिरते हैं तो जान-माल का नुकसान हो सकता है। इसी वजह से कोर्ट ने प्रशासन को मामले में देरी नहीं करने की हिदायत दी है।
आगे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी होगी
कोर्ट के आदेश में जोन-A में चिन्हित अवैध निर्माणों के खिलाफ उचित ध्वस्तीकरण कार्रवाई करने को भी कहा गया है। यानी मामला केवल सीलिंग तक सीमित नहीं है। जिन निर्माणों को अवैध पाया गया है, उनके खिलाफ आगे नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताते हुए अधिकारियों से कहा है कि अवैध निर्माणों को हटाने के लिए उन्हें तेजी से काम करना होगा।
हादसा हुआ तो अफसर होंगे जिम्मेदार
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को जिम्मेदारी को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि यदि किसी अवैध या जर्जर निर्माण के कारण कोई अप्रिय घटना होती है और लोगों की जान जाती है, तो जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।
उल्देपुर की अवैध कॉलोनियों की होगी जांच
मेरठ के उल्देपुर इलाके में बड़ी संख्या में अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित होने के मामले की भी जांच होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है।आयोग यह देखेगा कि वहां इतनी बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां कैसे विकसित हुईं और मेरठ विकास प्राधिकरण की भूमिका क्या रही। इस दौरान यह पहलू भी जांच के दायरे में रहेगा कि कहीं प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से तो अवैध कॉलोनियों का विकास नहीं हुआ।
पहले से सील 44 संपत्तियों पर भी कार्रवाई
उल्देपुर से जुड़े मामले में अदालत को बताया गया कि 44 संपत्तियों को पहले ही सील किया जा चुका है। इनमें से 20 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। बाकी संपत्तियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।इसके अलावा कुछ आवासीय संपत्तियों में चल रही अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों को भी बंद कराया गया है।
जोन-B, C और D की रिपोर्ट भी मांगी
फिलहाल अदालत के सामने जो विस्तृत आंकड़े आए हैं, वे मुख्य रूप से जोन-A से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जोन-B, C और D में मौजूद अवैध निर्माणों की पूरी जानकारी भी अगली सुनवाई में पेश करने को कहा है।मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होनी है। तब तक संबंधित प्राधिकरणों को कार्रवाई की स्थिति और बाकी जोन की रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।