Meerut Blue Drum Case: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल को मौत की सजा सुनाई है। दोनों पर मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या करने और शव को सीमेंट से भरे ड्रम में छिपाकर सबूत मिटाने का आरोप था।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड को लेकर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में दोषी करार दी गई मुस्कान रस्तोगी और उसके बॉयफ्रेंड साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस मामले को ब्लू ड्रम केस के नाम से भी जाना जाता है। सजा पर सुनवाई के दौरान दोनों दोषी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जुड़े थे। वहीं, सौरभ राजपूत की मां रेणु और परिवार के अन्य सदस्य भी अदालत में मौजूद थे। इससे पहले 30 सितंबर को अदालत ने दोनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था।
मुस्कान के माता-पिता ने भी सजा का विरोध नहीं करने की बात कही
सजा के ऐलान से पहले मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में लिखित बयान दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सौरभ को अच्छा लड़का बताते हुए कहा कि उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुस्कान को फांसी की सजा दी जाती है, तो उन्हें इसका विरोध नहीं होगा। परिवार ने मुस्कान से अपने संबंधों को लेकर भी दूरी जाहिर की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मुस्कान के परिजन उससे जेल में मिलने नहीं गए थे।
3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
मामले के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि मुस्कान ने अपने बॉयफ्रेंड साहिल के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाने की बात सामने आई थी। इस घटना के सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में रहा। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले से जुड़े सबूत पेश किए, जिन पर सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराया गया।
126 सुनवाई के बाद आया फैसला
रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 126 सुनवाई हुईं। अदालत ने सबूतों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी माना था। दोषसिद्धि के समय अदालत ने अपराध की गंभीरता और सबूत मिटाने की कोशिश से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया था। दोनों को सजा पर अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिए जाने की बात भी सामने आई थी। अब अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मौत की सजा के मामलों में कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया और जरूरी मंजूरियों का पालन किया जाता है।
यह भी पढ़ें: रायपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती पर उठे सवाल, सांसद तनुज पुनिया ने राज्यपाल से की कार्रवाई की मांग