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वंदे मातरम् पर मायावती का बड़ा बयान, बोलीं- देश में इस मुद्दे पर राजनीति करना ठीक नहीं

Shivashakti Narayan Singh · 21 अगस्त 2026
वंदे मातरम् पर मायावती का बड़ा बयान

Vande Mataram controversy: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही बहस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में इस मुद्दे को लेकर जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह उचित नहीं है। मायावती ने सवाल किया कि देश में वंदे मातरम् का पूरा गीत गाया जाना है या इसके शुरुआती दो छंद ही गाए जाने हैं।

मायावती ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर हाल में संसद में जो कानून पारित किया गया है, वह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों में सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों और फायदे के हिसाब से पहले से बने कानूनों में बदलाव करते रहे हैं।

राजनीतिक दलों पर जनता का ध्यान भटकाने का आरोप

BSP प्रमुख ने कहा कि सत्ता में आने वाली पार्टियां कई बार अपने राजनीतिक स्वार्थ या अपनी कमियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों को सामने लाती हैं। उनके मुताबिक कानूनों में बदलाव की राजनीति लंबे समय से देखने को मिलती रही है।

बेरोजगार युवाओं और छात्रों के मुद्दे उठाए

मायावती ने कहा कि इस समय देश के सामने कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर बेरोजगार युवाओं, छात्र-छात्राओं और स्कूली बच्चों से जुड़े मामलों को महत्वपूर्ण बताया।

बाढ़ से हो रहे नुकसान का भी किया जिक्र

अपने बयान में मायावती ने देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण हो रही जान-माल की भारी क्षति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकारों को जनता की परेशानियों और राहत से जुड़े जरूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

1. देश में वन्दे मातरम् गायन को पूरा गाना है या शुरू के दो छंद (पैरा) गाना है या नहीं गाना है, इसको लेकर जो इस समय में देश में राजनीति चल रही है, यह ठीक नहीं है और इस मामले में हमारी पार्टी का यही कहना है कि वन्दे मातरम् गायन को लेकर अभी हाल ही में संसद में जो क़ानून पास किया गया…

— Mayawati (@Mayawati) August 21, 2026

केंद्र और राज्य सरकारों को दी नसीहत

मायावती ने कहा कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी देश और जनहित से जुड़े अहम विषयों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

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