मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की 3 मांगों को फिर दोहराया, सोशल मीडिया पर लेटर किया पोस्ट
Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के चुनावी ढांचे के संबंध में पार्टी की तीन मुख्य मांगों को "गैर-समझौतावादी" (Non-negotiable/अपरिवर्तनीय) बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी। जिसमें उन्होंने लिखा- इन मांगों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के सहयोगी दल पूरे देश में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। खरगे ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे और एक चुनाव और एक मत के सिद्धांत की रक्षा के लिए नागरिक समाज और युवा संगठनों से भी इस आंदोलन में सहयोग करने की अपील की है।
कांग्रेस पार्टी की 3 माँगे non-negotiable हैं। पहली, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा दूसरी, SIR को रद्द करना तीसरी, Ballot Paper पर चुनाव कराना देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। जो भी Civil Society Members व Youth Organisations इन मुद्दों पर देश में जगह-जगह संघर्ष कर रहे हैं, हम उनके साथ हैं। दूसरी ओर भाजपा ने दिल्ली में महिला पत्रकारों का उत्पीड़न किया, वो बेहद निंदनीय है। तानाशाह बहुत घबराया हुआ है, ध्यान भटकाने के एक और अध्याय के लिए तैयार रहिए।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 5, 2026
पत्र में किन 3 मांगों का जिक्र?
खरडे ने अपने पत्र में लिखा है कि, कांग्रेस पार्टी की तीन मांगे अटल हैं। पहली ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ, दूसरी एसआईआर को रद्द करना और तीसरी मतपत्र के माध्यम से चुनाव कराना। इस समय देशव्यापी कांग्रेसी कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के सहयोगी इन तीनों मुद्दों को लेकर सडकों पर उतरे हुए हैं। देश के कई राज्यों में नागरिक समाज के सदस्य और युवा संगठन इन मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। हम उनके साथ खड़े हैं।
खरगे ने दिल्ली पुलिस और भाजपा पर लगाए आरोप
इसके साथ ही खरगे ने दिल्ली में महिला पत्रकार संग दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी मामले में चिंता जताई है। खरगे ने इस मामले में भाजपा पार्टी पर हमला करते हुए कहा- बीजेपी ने दिल्ली में महिला पत्रकारों को परेशान किया है, यह बेहद निंदनीय है। तानाशाह घबराया हुआ है। ध्यान भटकाने की राजनीति का एक और अध्याय देखने के लिए देश की जनता तैयार हो जाए।
पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश
यह टिप्पणी उस समय खरगे ने की जब दिल्ली में 3 अक्तूबर को अखिल भारतीय छात्र संघ और अन्य समूहों द्वारा एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। जंतर मंतर के पास हुए इस प्रदर्शन के दौरान एआईएएस अध्यक्ष नेहा बोरा समेत वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण समेत कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की थी।
क्या बोली पुलिस उपायुक्त
पुलिस उपायुक्त नेहा यादव द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदर्शनकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने की वजह से स्थल को खाली करने की चेतावनी दी। आदेश का पालन न करने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए जाने के बाद 3 महिलाओं ने खुद को पत्रकार बताकर शिकायत दर्ज की थी। विरोध स्थल पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान पुलिस पर दु्र्व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया गया।
6 अक्तूबर को चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे विपक्षी सांसद
नई दिल्ली के कॉनस्टिटयूशन क्लब में इंडिया ब्लॉक की समन्यवय बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देशव्यापी विरोध कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा इंडिया ब्लॉक के नेता 2 से 8 अक्तूबर तक जिला स्तर पर लोकतंत्र बचाओ मार्च निकालेगा। उनका कहना है कि विपक्षी सांसद 6 अक्तूबर को चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे। अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर संस्थागत मुद्दों पर चिंता जाहिर की है।
14 आपत्तियां कराई थी दर्ज
इस मुद्दे पर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधु ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर अभ्यास और अन्य चुनावी मामलों से संबंधित निर्णयों और प्रक्रियाओं के बारे में महत्वपूर्ण फाइलों पर 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट की गई आपत्तियों में फॉर्म 6, मतदाता सूची से हटाने और मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
गठबंधन की बैठक में तीन मांगों को रखा
30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस ने अपनी तीन मांगो को रखा था। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की गई इसके साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने या रद्द करने की मांग की गई है।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के अंदर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के कथित दुरुपयोग और गड़बड़ियों को देखते हुए आगामी सभी चुनाव फिर से मतपत्र प्रणाली के जरिए कराने की मांग उठाई गई है।
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