Maldives Pakistan Relations: मालदीव-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती से भारत की क्यों बढ़ी चिंता? हिंद महासागर में बनेगा नया समीकरण!
Maldives Pakistan Relations: मालदीव और कंगाल पाकिस्तान में एक नए तरह का समीकरण बनना शुरू हो गया है। जिसने भारत की टेंशन बढ़ा दी है। मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू हाल ही पाकिस्तान के दौरे पर थे। इस दौरान शहबाज शरीफ और मुइज्जू के बीच 20 से अधिक मुद्दों पर हस्ताक्षर हुए है। मुइज्जू ने 20 से 22 अक्टूबर के बीच पाकिस्तानी दौरे पर है।
11 साल में किसी मालदीव के राष्ट्रपति की यह पहली पाकिस्तान यात्रा थी। यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 साल पूरे होने के मौके पर हुआ। गौरतलब है कि हिंद महासागर में मालदीव की अहम भूमिका है। यही कारण है कि इस मामले में अब भारत की चिंता बढ़ गई है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
मालदीव-पाकिस्तान की बढ़ती दोस्ती बनी सिरदर्द
जानकारी के मुताबिक हाल ही में मालदीव और पाकिस्तान के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 20 समझौता एमओयू पर सहमति बनी। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, कृषि, साइबर सुरक्षा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
अब मालदीव के विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मुइज्जू पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही पाकिस्तान की दोस्ती को चिंता का विषय बताया है।
हिंद महासागर में बन सकता है नया समीकरण?
हिंद महासागर में भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समुद्री मार्गों की सुरक्षा, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। मालदीव की भौगोलिक स्थिति उसे इस रणनीति में अहम बनाती है।
अगर मालदीव और पाकिस्तान के बीच रक्षा तथा समुद्री सुरक्षा सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत को इन समझौतों की शर्तों, उनके क्रियान्वयन और क्षेत्रीय प्रभावों पर नजर रखनी होगी। दूसरी ओर, मालदीव के साथ भारत के आर्थिक, विकासात्मक और सुरक्षा संबंध भी इस समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।
भारत की चिंता का एक प्रमुख पहलू यह है कि हिंद महासागर में किसी बाहरी देश की सुरक्षा गतिविधियां क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। अगर भविष्य में पाकिस्तान और मालदीव के बीच रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ता है, तो भारत को उसके स्वरूप और संभावित प्रभावों का आकलन करना होगा।
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