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भारतीयों को बड़ा झटका! अमेरिका में नौकरी के लिए अब देने पड़ सकते हैं करीब 92 लाख रुपये, जानें किस पर होगा असर

Shivani Gupta · 25 अगस्त 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

आम लोगों का विदेश में नौकरी करना अब और भी महंगा हो गया हैं क्योंकि अमेरिका ने एक बार फिर H-1B वीजा की फीस बढ़ाने की बात की है हालांकि ट्रंप प्रशासन ने नए जारी होने वाले H-1B वीजा के 1,03,265 डॉलर की भारी फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 92 लाख रुपये के आसपास बैठती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह आम अमेरिकी वीजा की कीमत नहीं है, बल्कि H-1B वर्क वीजा से जुड़ी प्रस्तावित फीस है।

H-1B वीजा क्या है?
H-1B वीजा अमेरिका की ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां तकनीकी और दूसरे विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकती हैं। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स लंबे समय से इस वीजा के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहे हैं। अब नई प्रस्तावित फीस लागू होती है तो अमेरिका में भारतीय कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर खर्च का बोझ काफी बढ़ सकता है।

पहले कितनी थी फीस?
रिपोर्ट के मुताबिक नई प्रस्तावित रकम $103,265 है, जबकि पहले H-1B प्रक्रिया से जुड़ी फीस कई मामलों में कुछ हजार डॉलर के स्तर पर थी। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इससे अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करेंगी और अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देने व उन्हें प्रशिक्षित करने पर ज्यादा जोर देंगी।

क्या हर भारतीय को देने होंगे 92 लाख रुपये?
नहीं। यही इस खबर का सबसे जरूरी हिस्सा है। यह रकम सामान्य टूरिस्ट या स्टूडेंट वीजा की फीस नहीं है। प्रस्ताव मुख्य रूप से नए H-1B वीजा आवेदनों से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा H-1B रिन्यूअल पर यह शुल्क लागू नहीं होगा और कुछ श्रेणियों को छूट भी मिल सकती है।

भारतीय छात्रों और IT प्रोफेशनल्स पर क्या असर?
अगर यह नियम लागू होता है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय और दूसरे विदेशी कर्मचारियों को H-1B के जरिए नियुक्त करना काफी महंगा हो सकता है। इससे कंपनियां नए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर ज्यादा सावधानी बरत सकती हैं। इसका असर खासतौर पर आईटी, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और दूसरे हाई-स्किल सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों पर पड़ सकता है।

क्या यह नियम अभी लागू हो गया है?
अभी इसे प्रस्तावित नियम के तौर पर देखा जाना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन ने इसे स्थायी नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की है और इस पर कानूनी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इसलिए अंतिम व्यवस्था आने तक इसमें बदलाव संभव है।

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