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Explainer: आर्मी से राष्ट्रपति भवन तक: कौन हैं मेजर नव्या शेखावत, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बनी ‘परछाई’?

MADHVI TANWAR · 15 सितम्बर 2026
नाव्या शेखावत

देश के राष्ट्रपति का एडीसी होना किसी शान से कम नहीं है और हो भी क्यों न। जितना बड़ा पद होता है उतना ही उस पद पर तैनात सख्स का सम्मान होता है। लेकिन इसी पद के लिए त्याग और अनुशासन की इतनी ज्यादा जरूरत होती है, कि सामने वाले शख्स के लिए उसके पद पर तैनात रहना दुनिया की सबसे कठिन नौकरियों में से एक बना देता है। देश की महामहिम राष्ट्रपति के साथ साए की तरह चलने वाले शख्स को देखकर मन में सवाल जरूर पैदा होता है कि आखिर यह कौन है और यहां तक कैसे पहुंचा?

गौरतलब है कि बीते दिन राष्ट्रपति के Aide-de-Camp यानी एडीसी के पद पर तैनात ‘नेशनल क्रश’ कहने जाने वाले मशहूर मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद सवाल उठा कि राष्ट्रपति का अगला ADC कौन?

नव्या शेखावत का नाम ADC के लिए फाइनल

ज्ञात है कि राष्ट्रपति का साया बनकर सभी प्रोटोकॉल को संभालना ही ADC का काम नहीं होता। बल्कि उनकी सुरक्षा व जरूरतों को भी ध्यान में रखना होता है। मेजर ऋषभ सिंह संब्याल द्वारा अपने पद को लेकर कई दिलचस्प और हैरान करने वाली चीजें सामने आई हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि, आम फौजी जब अधिकारी बनकर राष्ट्रपति भवन के गलियारों तक पहुंचता है तो वह सफर कांटो भरा होता है। अनुशासन का ध्यान रखना होता है। ऋषभ सिंह संब्याल के बाद अब राष्ट्रपति का अगला एडीसी बनने का मौका मेजर नव्या शेखावत को मिला है।

कौन है मेजर नव्या शेखावत?

राष्ट्रपति भवन में तैनात भारतीय सेना की युवा महिला अधिकारी मेजर नव्या शेखावत पर इस समय सभी की नजरे टीकी हैं। हो भी क्यों न क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की एड्स-डी-कैंप (ADC) नियुक्त होने वाली वह सेना की पहली महिला अधिकारी हैं। इस पद पर तैनाती के साथ ही वे राष्ट्रपति की एडीसी का पद संभालने वाली वह दूसरी महिला अधिकारी बन गई हैं। उनसे पहले 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी भी इस पद पर तैनात रह चुकी हैं।

कैसे पाया मेजर का रैंक?

देश की सेवा के लिए मेजर नव्या शेखावत आर्मी में एंट्री यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज में शामिल हुई थी। बाद में उन्हें शॉर्ट सर्विस कमीशन विमेन नॉन-टेक्निकल कोर्स के लिए चुना। वह चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग पर तैनात रही। उनका नाम ऑफिशियल सीडीएस (I) 2020 OTA विमेंस मेरिट लिस्ट में भी है। अपनी ट्रेनिंग पूरी कर उन्हें आर्मी सर्विस कोर में कमीशन मिला। वह आर्मी के अंदर लॉजिस्टिक सपोर्ट से भी मेजर नव्या एक ब्रांच से जुड़ी। साल 2021 में कमीशन मिला और लगभग 5 साल में वह मेजर के रैंक पर तक पहुंच गईं।

कैसे होता है राष्ट्रपति के ADC का चयन?

राष्ट्रपति के अगला ADC किसी हीरे से कम नहीं होता। कोयले की खदान से हीरे की तलाश करने के जैसे ही ADC माना जाता है। इस पद की नियुक्ति के लिए कोई खुली या सीधी भर्ती नहीं होती। और न ही इस पद के लिए कोई भी आम नागरिक आवेदन कर सकता है। इसके लिए केवल भारतीय थल सेना (Army), नौसेना (Navy) और वायु सेना (Air Force) के कमिशंड अधिकारी ही पात्र होते हैं। सेना में कमिशंड अफसर बनने के लिए युवाओं को यूपीएससी एनडीए (NDA) या सीडीएस (CDS) की कठिन परीक्षा पास करनी होती है।

तीनों सेनाओं से 20 से 30 अधिकारी होते हैं शॉर्टलिस्ट

ADC बनने के लिए सेना में अधिकारी को कम से कम 5 से 7 साल की सेवा पूरी करनी जरूरी है। उनके पिछले कार्य में उनका पूरा रिकॉर्ड, उनकी शारीरिक क्षमता, गोपनीय रिपोर्ट को जांचा जाता है। इसके आधार पर ही एडीसी पद के लिए नाम शॉर्टलिस्ट होता है। तीनों सेनाओं से कुल 20 से 30 बेहतरीन अधिकारियों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है। यहां तक पहुंचने वाला अधिकारी अपनी यूनिट में भी एक सफल अधिकारी रहना बेहद जरूरी है।

इंटरव्यू ऐसा अग्निपरीक्षा जैसा

ADC पद के लिए चयन प्रक्रिया देश में सबसे कठिन प्रक्रियाओं में शामिल है। पहले चरण में शॉर्टलिस्ट किए गए अधिकारियों को सर्विस हेडक्वॉर्टर में इंटरव्यू देना पड़ता है। जहां पर करेंट अफेयर्स और सिचुएशनल अवेयरनेस की परीक्षा से गुजरना होता है। इसमें से चयनित 5 अधिकारियों को राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है। जहां 14 दिनों तक उनका इंटरव्यू होता है।

14 दिनों में अधिकारियों की होती है परख

वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति के सचिव उम्मीदवारों पर काफी ज्यादा मानसिक दबाव होता है। ऐसे में बेहद बारिकी से कमियों को खोजा जाता है। जिसकी वजह से उम्मीदवार बाहर भी हो जाता है। मेजर ऋषभ की माने तो जियोपॉलिटिक्स या किसी विषय पर कमजोर दिखने पर सामने अधिकारियों का पैनल भी आपसे बार-बार वही एक सवाल पूछता है। 14 दिनों के इंटरव्यू के दौरान किसी को उसकी गलती नहीं बताई जाती बल्कि बारिकी से परखा जाता है। वे रात में पढ़ाई करते हैं जिससे अगले दिन सुधार ला पाए।

एडीसी को पर्सनल लाइफ त्यागकर रहना पड़ता है अकेले

एक इंटरव्यू में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने कहा कि इस पद की प्रतिष्ठित को बनाए रखने के लिए कई शर्तें और सीमाएं हैं। जिन्हें सुनकर आम आदमी भी हैरान हो जाता है। राष्ट्रपति के एडीसी पद पर रहते हुए अधिकारी को अपना परिवार और निजी जीवन दूर रखना पड़ता है। राष्ट्रपति के साथ 24 घंटे साए की तरह रहने की वजह से सामान्य जीवन नहीं जी सकते। हर समय सतर्क रहना और देश-दुनिया की पल-पल की खबरों से अपडेट रहना उनकी रोजाना की दिनचर्या में शामिल रहता है।


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