Mahmudabad Assembly Seat: महमूदाबाद में कभी BJP, कभी SP का दबदबा, 2027 से पहले जानिए पूरा चुनावी इतिहास
UP Vidhan Sabha Chunav 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी तेज हो चुकी है और चुनावी हवा बहने लगी है। इसी चुनावी माहौल के बीच TNP News के खास कार्यक्रम '27 की सत्ता' की टीम जमीनी हकीकत जानने के लिए सीतापुर के चर्चित महमूदाबाद विधानसभा सीट पर पहुंची है।सीतापुर की महमूदाबाद विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है।
2017 में सपा के नरेंद्र सिंह वर्मा ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की, जबकि 2022 में भाजपा की आशा मौर्य ने 5,222 वोटों से सीट जीती। 2024 के लोकसभा चुनाव ने यहां के समीकरण को फिर चर्चा में ला दिया। हमारी 'ग्राउंड जीरो' रिपोर्ट में जानिए कि महमूदाबाद की जनता का क्या मिजाज है, उन्होंने बीते सालों में क्या खोया और क्या पाया, और यहां के लोगों ने आगामी चुनाव को लेकर क्या खास राय रखी है।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की महमूदाबाद विधानसभा सीट जिले की प्रमुख विधानसभा सीटों में शामिल है। यह सामान्य यानी गैर-आरक्षित सीट है और सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मौजूदा परिसीमन के बाद इसका विधानसभा नंबर 151 है।महमूदाबाद नगर पालिका क्षेत्र के अलावा पैतेपुर नगर पंचायत और आसपास के ग्रामीण इलाके इस विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। सीट का बड़ा हिस्सा ग्रामीण आबादी वाला है, इसलिए यहां विधानसभा चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान रुझान खास महत्व रखते हैं।
1962 से शुरू हुआ चुनावी सफर
महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र में पहली बार 1962 में विधानसभा चुनाव हुआ था। इसके बाद अलग-अलग चुनावों में कांग्रेस, भारतीय जनसंघ, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, भाजपा और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों को यहां जीत मिली।इस सीट के चुनावी इतिहास में नरेंद्र सिंह वर्मा का नाम खास तौर पर सामने आता है। उन्होंने अलग-अलग चुनावों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के टिकट पर महमूदाबाद से जीत दर्ज की। 2012 और 2017 में वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लगातार दो बार विधायक बने।
2012 में SP की एंट्री, नरेंद्र सिंह वर्मा बने अहम चेहरा
2012 के विधानसभा चुनाव में नरेंद्र सिंह वर्मा ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और बसपा के अहमद अंसारी को 19,589 वोटों के अंतर से हराया। वर्मा को 86,580 वोट मिले थे, जबकि अहमद अंसारी को 66,991 वोट मिले।इसके बाद 2017 में मुकाबला काफी करीबी रहा। समाजवादी पार्टी के नरेंद्र सिंह वर्मा ने भाजपा की आशा मौर्य को महज 1,906 वोटों से हराया। वर्मा को 81,469 और आशा मौर्य को 79,563 वोट मिले।
2022 में BJP की वापसी
2022 के विधानसभा चुनाव में महमूदाबाद का नतीजा फिर बदल गया। भाजपा की आशा मौर्य ने समाजवादी पार्टी के नरेंद्र सिंह वर्मा को 5,222 वोटों से हराकर सीट अपने नाम की।आशा मौर्य को 92,091 वोट मिले, जबकि नरेंद्र सिंह वर्मा को 86,869 वोट मिले। इस जीत के साथ भाजपा ने 2017 की हार के बाद महमूदाबाद सीट पर वापसी की। आशा मौर्य इस सीट से पहली महिला विधायक भी बनीं।
2024 लोकसभा चुनाव ने फिर बदला माहौल
विधानसभा चुनाव के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र का वोटिंग पैटर्न फिर चर्चा में आया। आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, सीतापुर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राकेश राठौर को महमूदाबाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार से बढ़त मिली।इससे यह संकेत जरूर मिला कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यहां मतदाताओं का रुझान एक जैसा रहना जरूरी नहीं है। 2022 में विधानसभा सीट भाजपा के खाते में गई, जबकि 2024 में विपक्षी गठबंधन को इस विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली।
महमूदाबाद का चुनावी गणित
महमूदाबाद का चुनावी समीकरण कई सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच वोटों के बंटवारे पर निर्भर करता है। क्षेत्र में मुस्लिम, अनुसूचित जाति और विभिन्न ओबीसी समुदायों के साथ सवर्ण मतदाता भी हैं।हालांकि किसी भी चुनाव में किसी समुदाय का पूरा वोट एक ही पार्टी या उम्मीदवार को जाता है, ऐसा मान लेना सही नहीं होगा। उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, पार्टी संगठन और चुनावी गठबंधन भी नतीजों को प्रभावित करते हैं।इसी वजह से महमूदाबाद में पिछले चुनावों के नतीजों को केवल किसी एक जातीय या धार्मिक समीकरण से समझना आसान नहीं है।
2027 से पहले जनती की क्या है राय?
महमूदाबाद में पिछले दो विधानसभा चुनावों के नतीजे देखें तो मुकाबला लगातार बदलता रहा है। 2017 में SP ने BJP को 1,906 वोटों से हराया था, जबकि 2022 में BJP ने SP को 5,222 वोटों से पीछे किया। हमारी टीम से बातचीत में लोगों ने बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र के भीतर विपक्षी गठबंधन को मिली बढ़त ने 2027 के लिए एक अलग राजनीतिक संदर्भ जरूर तैयार किया है।
हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे, उम्मीदवार और मतदान व्यवहार अलग हो सकते हैं, इसलिए 2024 के आंकड़ों को 2027 के नतीजे का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा।फिलहाल महमूदाबाद की राजनीति में BJP की मौजूदा विधानसभा उपस्थिति, SP का मजबूत पिछला प्रदर्शन और 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी बढ़त तीन अहम संदर्भ हैं। 2027 में टिकट, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों के साथ ये समीकरण किस तरह बदलते हैं, इससे चुनावी मुकाबले की दिशा तय होगी।