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लखनऊ से बहराइच का सफर होगा आसान, 3-4 घंटे की जगह डेढ़ घंटे में पहुंचेंगे; 6,969 करोड़ से बनेगा हाईवे

Shivani Gupta · 3 नवम्बर 2026
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लखनऊ: लखनऊ से बहराइच जाने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब तक इस सफर को पूरा करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है, लेकिन जल्द ही यह दूरी महज 1 से डेढ़ घंटे में तय की जा सकेगी। इसके लिए बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 बनाया जाएगा। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की तैयारियां तेज हो गई हैं। 

मुख्य बातें:

  • लखनऊ से बहराइच का सफर 1 से डेढ़ घंटे में होगा पूरा।
  • बाराबंकी से बहराइच तक करीब 101 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनेगा।
  • परियोजना पर 6,969.04 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान।
  • शुरुआत में चार लेन का बनेगा हाईवे, बाद में छह लेन तक विस्तार संभव।

4 लेन का बनेगा बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे

बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे को शुरुआत में चार लेन का बनाया जाएगा। भविष्य में वाहनों का दबाव बढ़ने पर इसे छह लेन तक विस्तारित करने की योजना है। यह हाईवे लखनऊ-रुपईडीह कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके निर्माण से लखनऊ और बहराइच के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर हो जाएगा। नया हाईवे आबादी और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर बनाया जाएगा। एक्सेस कंट्रोल्ड होने के कारण इस पर अनियंत्रित क्रॉसिंग और अन्य रुकावटें नहीं होंगी। इससे वाहनों को बिना बार-बार रुकावट के सफर करने में मदद मिलेगी।

इन जिलों और कस्बों को मिलेगा फायदा

करीब 101 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर, फखरपुर और बहराइच जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इसके अलावा गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती के लोगों को भी आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। परियोजना के तहत करीब 48.28 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाने की भी योजना है। स्थानीय वाहनों की आवाजाही के लिए सर्विस लेन विकसित की जाएगी। इसके साथ ही नेशनल हाईवे-27, 330एन, 730 और स्टेट हाईवे-13 व 30बी जैसे मार्गों से भी संपर्क बेहतर होगा।

नेपाल बॉर्डर तक कारोबार को मिलेगी रफ्तार

इस एक्सप्रेसवे का महत्व केवल लखनऊ और बहराइच के बीच यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं है। बेहतर सड़क नेटवर्क से नेपाल सीमा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान होगा। इससे सीमा पार व्यापार, पर्यटन और मालवाहक वाहनों की आवाजाही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

तराई क्षेत्र में पैदा होने वाले फल और सब्जियों को लखनऊ समेत दूसरे बड़े शहरों की मंडियों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है। वहीं, ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाला समय और ईंधन भी बचेगा।

6,969 करोड़ की लागत, जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे 1,574 करोड़

बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित करने की योजना है। इस मॉडल में परियोजना की लागत का बड़ा हिस्सा निजी भागीदारों की ओर से लगाया जाता है, जबकि सरकार तय शर्तों के अनुसार किस्तों में भुगतान करती है।

परियोजना की कुल अनुमानित लागत 6,969.04 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 1,574 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण पर खर्च किए जाने का अनुमान है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के रास्ते में वन विभाग की लगभग 70 हेक्टेयर जमीन भी आ रही है। इसके लिए करीब 900 करोड़ रुपये मुआवजे का प्रावधान बताया गया है। वन क्षेत्र से जुड़े नियमों के तहत काटे जाने वाले पेड़ों के बदले दस गुना पौधे लगाने की भी योजना है।

79 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान

इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अनुमान के मुताबिक, एक्सप्रेसवे से करीब 36 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 43 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, कृषि, परिवहन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को फायदा पहुंचने की संभावना है।

कुल मिलाकर, बाराबंकी-बहराइच एक्सप्रेसवे बनने के बाद लखनऊ से बहराइच का सफर पहले के मुकाबले काफी आसान हो सकता है। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि तराई क्षेत्र के जिलों को व्यापार और विकास के नए अवसर भी मिल सकते हैं।

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