कोलकाता पंडाल भगदड़ में 19 मौतें, पूजा समिति के पदाधिकारी समेत 7 लोग पुलिस हिरासत में
Kolkata Pandal Stampede: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद अब जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि भीड़ को संभालने में कहां चूक हुई और हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। आपको बता दें कि शनिवार शाम हुए हादसे में 19 लोगों की जान चली गई। मामले में गिरफ्तार सात लोगों को रविवार को बांकशाल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने अदालत से 14 दिन की हिरासत मांगी थी। गिरफ्तार लोगों में पूजा समिति के पदाधिकारी, निर्माण कार्य से जुड़ा व्यक्ति, भीड़ प्रबंधन में लगे लोग और निजी सुरक्षा प्रभारी शामिल हैं। पुलिस ने आयोजकों और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आयोजकों से भीड़ प्रबंधन तक, इन सात लोगों पर जांच
कोलकाता पुलिस ने इस मामले में जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवड़ा उर्फ राजा, उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और बांस के ढांचे के निर्माण से जुड़े बिप्लब मुखर्जी उर्फ जॉय शामिल हैं। इसके अलावा कौशिक साहा को भी गिरफ्तार किया गया है, जो भीड़ प्रबंधन और VIP पास की जांच से जुड़ा था। पिंटू डे भी भीड़ प्रबंधन के काम में लगा था। सुमन चक्रवर्ती और राजेश पाल निजी सुरक्षा प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। इस मामले में 14 अन्य लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है। फिलहाल अदालत की ओर से आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजे जाने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए किसकी कितनी जिम्मेदारी थी।
बचाव पक्ष का दावा- लोगों की मदद करने पहुंचे थे आरोपी
आरोपियों के वकील एमडी यासिम रहमान ने अदालत में दावा किया कि उनके मुवक्किल बाहर से दुर्गा पूजा देखने आए थे। उनके मुताबिक, जब उन्होंने भारी भीड़ और लोगों को परेशानी में देखा, तो वे बचाव कार्य में मदद करने लगे। वकील ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों की हिरासत 1 नवंबर तक मांगी थी, लेकिन अदालत ने उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा। बचाव पक्ष की दलील और पुलिस की जांच के निष्कर्ष अलग-अलग हैं; घटना में आरोपियों की वास्तविक भूमिका का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी, निष्पक्ष जांच की मांग
हादसे के बाद राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने कहा कि यह समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले उन लोगों के नुकसान और परिवारों के दर्द पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है। उनके मुताबिक, राजनीतिक स्तर पर घटना की समीक्षा बाद में हो सकती है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने हादसे को बेहद दुखद बताया और कहा कि इस तरह के आयोजनों में सावधानी बरतना जरूरी है। वहीं, कांग्रेस नेता सुमन रॉय चौधरी ने निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पंडाल में पुलिस की मौजूदगी पर्याप्त नहीं थी।
STF की जांच शुरू, मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता
राज्य सरकार ने मृतकों के प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए विशेष कार्यबल (STF) से जांच भी शुरू कराई गई है। कोलकाता पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत स्वतः संज्ञान लेकर केस दर्ज किया है। संभावित अशांति को रोकने के लिए शहर के कुछ हिस्सों में 18 से 20 अक्टूबर तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 भी लागू की गई है। रविवार को मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए। अब जांच में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पंडाल के ढांचे और आयोजकों की भूमिका जैसे सवाल अहम होंगे। 19 लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि धार्मिक आयोजन में उमड़ी भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजाम कहां नाकाम हुए और क्या इस हादसे को रोका जा सकता था।