किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर हमला, बोले- संवैधानिक संस्थाओं का अपमान गलत
नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के अधिकारियों पर खुलेआम निशाना साधना गलत है। रिजिजू का यह बयान उस समय आया, जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत INDIA गठबंधन के कई नेता चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर रहे थे।
रिजिजू ने कांग्रेस को दिशाहीन बताते हुए कहा कि विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक अधिकारियों का खुलेआम अपमान करना निंदनीय है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विपक्ष की आलोचना करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विरोध
दरअसल, INDIA गठबंधन के नेता चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च में शामिल हुए। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए और योग्य मतदाताओं के नाम नहीं हटाए जाने चाहिए।
कांग्रेस के नेतृत्व पर भी साधा निशाना
रिजिजू ने अपने बयान में कांग्रेस के नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को एक गंभीर और प्रतिबद्ध नेता की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी कार्यशैली को लेकर भी टिप्पणी की।
वहीं, विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को अदालत के सामने रखना चाहते हैं। मार्च के दौरान दिल्ली में कई जगहों पर पुलिस की तैनाती और बैरिकेडिंग की गई, जिससे कुछ प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था। अदालत की ओर से कहा गया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामले पहले से न्यायिक विचाराधीन हैं, इसलिए विपक्ष को अपनी मांगों के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इससे सुप्रीम कोर्ट के कामकाज, वकीलों, कर्मचारियों और मुकदमे से जुड़े लोगों की आवाजाही में बाधा नहीं आनी चाहिए।