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लंदन की सड़कों पर गूंजा कश्मीर का दर्द, महिलाओं-बच्चों समेत कश्मीरी समुदाय ने उठाई इंसाफ की आवाज

Shailesh Yadav · 22 सितम्बर 2026
Representative Image (File Photo/X@JAAC__Official)

London Kashmir Protest: ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर नागरिकों की हत्या, गिरफ्तारियों, बल प्रयोग और जबरन गुमशुदगी के विरोध में लंदन में प्रदर्शन किया। जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के मुताबिक, ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में कश्मीरी इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे। प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के पास एकत्र होकर पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ नारे लगाए। JKJAAC के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 'Foreign Forces Go Back', 'Pakistani Forces Go Back' 'Stop Killing in Kashmir' जैसे नारे लगाए गए

महिलाओं और बच्चों ने भी उठाई आवाज
प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों के हाथों में पोस्टर और बैनर नजर आए। JKJAAC के मुताबिक, इन पोस्टरों के जरिए कथित तौर पर मारे गए लोगों के लिए न्याय, जबरन गुमशुदगी रोकने, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई और उनके बारे में जानकारी उपलब्ध कराने तथा मौलिक मानवाधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई।

डाउनिंग स्ट्रीट से ट्राफलगर स्क्वायर तक मार्च
10 डाउनिंग स्ट्रीट के पास प्रदर्शन के बाद प्रतिभागियों ने मध्य लंदन में मार्च निकाला। यह रैली ट्राफलगर स्क्वायर पहुंचकर समाप्त हुई। संगठन ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर की स्थिति की ओर आकर्षित करना था।

JKJAAC के एक बयान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित परिवारों के लिए न्याय की मांग की और क्षेत्र में कथित नागरिक मौतों, गिरफ्तारियों, हिरासत तथा संचार प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई।

ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया का भी किया गया जिक्र
यह प्रदर्शन पाकिस्तान-प्रशासित जम्मू-कश्मीर में घटनाक्रम को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच हुआ है। JKJAAC पहले भी क्षेत्र में कथित हत्याओं, गिरफ्तारियों और संचार प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग कर चुका है।

ब्रिटिश सरकार ने भी हाल के महीनों में क्षेत्र में नागरिकों की मौत, गिरफ्तारियों और संचार प्रतिबंधों से जुड़ी रिपोर्टों पर चिंता जताई है और मानवाधिकारों के सम्मान, संयम तथा शांतिपूर्ण बातचीत का आह्वान किया है।