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काशी में दौड़ेगा हवा में सफर: भारत के पहले अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे की टेस्टिंग शुरू, दीवाली से पहले मिलेगी सौगात

MADHVI TANWAR · 25 सितम्बर 2026
अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के काशी में विश्व का तीसरा और भारत का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे बनाया जा रहा है। इसका काम काफी तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद है कि इसी साल दीवाली से पहले ही इस रोपवे को पूरी तरह से आम लोगों के लिए संचालित किया जाएगा। काम तेज़ी से चल रहा है और अभी ट्रायल रन किए जा रहे हैं। वाराणसी में इसका विद्यापीठ रोपवे स्टेशन नाम रखा गया है। इसके जरिए कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया महज 15 मिनट में पहुंच जाएंगे। इसका किराया भी काफी कम होगा।

अंतिम चरण में प्रोजेक्ट का 94,35 प्रतिशत निर्माण कार्य

शिव नगरी काशी के लोगों को जल्द ही जाम से मुक्ति मिलने वाली है। इस प्रोजेक्ट का 94,35 प्रतिशत निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। काशी विद्यापीठ स्टेशन पर इसका ट्रायल शुरु हो चुका है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। लोगों को जाम से मुक्ति के साथ-साथ साफ हवा का भी आनंद मिलेगा।

#WATCH उत्तर प्रदेश | काशी में दुनिया का तीसरा और भारत का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे बनाया जा रहा है। काम तेज़ी से चल रहा है और अभी ट्रायल रन किए जा रहे हैं।

(वीडियो वाराणसी के विद्यापीठ रोपवे स्टेशन से है) pic.twitter.com/BlB8xtPtGN

— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 24, 2026

कैंट-गोदौलिया रोपवे परियोजना का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जा रहा है। स्टेशनों को चमकाने के और रोपवे के स्पीड पर अभी काम चल रहा है। इस रोपवे की शुरुआत जल्द से जल्द और दीवाली से पहले ही पूरी करने की तैयारी हो रही है। टेस्टिंग और ट्रायल का काम भी तेजी से किया जा रहा है।

रोपवे के लिए 5 स्टेशनों का हुआ निर्माण

इस रोपवे के निर्माण कार्य के दौरान दूरी का विशेष ध्यान रखा गया है। 3.85 लंबे इस रोपवे परियोजना में करीब 5 स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा. गिरजाघर वाला स्टेशन विशेष तकनीकी खासियतों के साथ बनाया गया है। काम पूरा होने और इसके संचालन के साथ कैंट से गोदौलिया के बीच की आवागम आसान हो जाएगा। रोपवे को सहारा देने के लिए करीब 29 टावर बनाए गए हैं। रोपवे समय की बचत तो करेगा ही साथ ही ट्रैफिक के दबाब को भी कम करेगा।


जानिए इसकी खासियत

रूट और दूरी: यह रोपवे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन को गोदौलिया (काशी विश्वनाथ धाम के पास) से जोड़ेगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 3.85 किलोमीटर है।

सड़क मार्ग से कैंट से गोदौलिया की दूरी तय करने में 45 मिनट या इससे अधिक समय लगता है,जो रोपवे के शुरू होने पर मात्र 16 मिनट में पूरी हो जाएगी।

स्टेशन और टावर: इस पूरे कॉरिडोर में कुल 5 स्टेशन (कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया) और 29 टावर बनाए गए हैं।

लागत: इस आधुनिक परियोजना के निर्माण पर लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत आई है।

वैश्विक पहचान: मेक्सिको सिटी और बोलीविया के बाद वाराणसी दुनिया का तीसरा ऐसा शहर बनने जा रहा है, जहाँ सार्वजनिक परिवहन के रूप में रोपवे का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

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