टीएनपी न्यूज़
होम / राज्य
राज्य

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार का विरोध जारी, CM डीके शिवकुमार बोले- लागू होने से प्रभावित होंगे किसान और स्थानीय लोग  

Pradeep Singh · 20 सितम्बर 2026
डीके शिवकुमार

 

हासन: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार का विरोध दोहराया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट लागू होने से स्थानीय लोगों, किसानों और जंगलों के आसपास रहने वाले समुदायों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।

विशेष विधानसभा सत्र से पहले हासन में पत्रकारों से बातचीत

विशेष विधानसभा सत्र से पहले हासन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि पिछली सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल में भी राज्य ने इस रिपोर्ट को खारिज किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे दोबारा विचार के लिए वापस भेजा है। केंद्र ने कर्नाटक से 27 सितंबर तक पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESA) अधिसूचना पर अंतिम रुख बताने को कहा है।

प्रभावित इलाकों का दौरा कर लोगों की राय जानी

शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा कर लोगों की राय जानी है। उन्होंने चिक्कमगलुरु, करवार, कोडागु, मैसूर और शिवमोग्गा जैसे कॉफी उत्पादक और वन क्षेत्र से जुड़े जिलों में जाकर किसानों और स्थानीय लोगों से बातचीत की।

उन्होंने कहा, "लोगों ने मुझे बताया है कि अगर रिपोर्ट लागू होती है तो उनकी आजीविका और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।"

बीजेपी ने पिछली चर्चाओं को रोकने की कोशिश की

मुख्यमंत्री ने विपक्षी बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली चर्चाओं को रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों और जंगल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधानसभा और विधान परिषद में इस मुद्दे पर चर्चा करेगी।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याएं सुनने पर ध्यान दे रही है। उन्होंने मंत्रियों को हर शनिवार ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों की शिकायतें सुनने के निर्देश दिए हैं।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट क्या है?

कस्तूरीरंगन समिति ने पश्चिमी घाट के करीब 37 प्रतिशत हिस्से (लगभग 56,825 वर्ग किलोमीटर) को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में खनन, पत्थर खनन, बड़े थर्मल पावर प्रोजेक्ट और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर रोक लगाने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

कर्नाटक के कई स्थानीय निवासी, किसान और जनप्रतिनिधि आशंका जताते रहे हैं कि ESA नियम लागू होने से खेती, निर्माण गतिविधियों और स्थानीय विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है।

कर्नाटक सरकार ने 21, 22 और 23 सितंबर को विशेष विधानसभा सत्र बुलाया है, जिसमें सूखे की स्थिति, किसानों की समस्याओं और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।

यह भी पढ़ें: