JD Vance के बयान पर भारत ने जताई नाराज़गी, क्या भारत अमेरिका के बीच बढ़ेगी खटास
JD Vance: भारत और अमेरिका के बीच बीते कुछ महीनों से रिश्तें लगातार खराब होते जा रहे है। इसी बीच अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत को लेकर बेहद शर्मनाक टिप्पणी की है। वहीं अब इस मामले में भारत ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी आपत्ति जाहिर की है।
अमेरिका लगातार अमेरिका आने वाले भारतीयों पर प्रतिबंध लगाने पर लगा हुआ है, चाहे वह एच-1बी वीजा में बदलाव हो या फिर अमेरिका में रहे भारतीयों पर कड़े कानून हो। ट्रंप प्रशासन लगातार नए-नए कदम उठा रही है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी अहम जानकारी।
जेडी वेंस के बयान पर भारत ने जताई आपत्ति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, "हमें कुछ कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफ़िकेशन (PERM) प्रोग्राम के बारे में U.S. डिपार्टमेंट ऑफ़ लेबर के फ़ैसले के बारे में पता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि PERM, H-1B वीज़ा प्रोग्राम से अलग है।
PERM एप्लीकेशन के सस्पेंशन से, अपने आप में, मौजूदा H-1B वीज़ा की वैलिडिटी या H-1B वीज़ा होल्डर्स और उनके डिपेंडेंट्स के स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ता है, हालाँकि प्रभावित कंपनियों के एलिजिबल एम्प्लॉइज के परमानेंट-रेज़िडेंसी/ग्रीन कार्ड प्रोसेस पर कुछ असर पड़ सकता है। यह भी साफ़ होना चाहिए कि टैलेंट मोबिलिटी दोनों इकॉनमी में वैल्यू जोड़ती है।
जहाँ यह इंडियंस के लिए मौके बनाती है, वहीं यह US कंपनियों को कटिंग-एज टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, प्रोडक्टिविटी, कॉम्पिटिटिवनेस और जॉब क्रिएशन के साथ-साथ US में शेयरहोल्डर वेल्थ बनाने में भी उतनी ही मदद करती है। इसलिए यह दोनों देशों के लिए बहुत ज़्यादा आपसी फ़ायदे का एरिया है और हमारी उम्मीद है कि इस प्रोसेस में शामिल सभी स्टेकहोल्डर्स इस बात को समझ सकते हैं।
US द्वारा बताए गए कदम दोनों देशों के कॉमन एम्बिशन को आगे नहीं बढ़ाते हैं। हमने इस बारे में US वाइस प्रेसिडेंट के कुछ कमेंट्स भी देखे हैं। हमारा मानना है कि ऐसी बातें गलत हैं और हम इस बात को नज़रअंदाज़ करते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स में भारतीय प्रोफेशनल्स बहुत पढ़े-लिखे और स्किल्ड हैं और उसकी इकॉनमी और इनोवेशन इकोसिस्टम में योगदान देते हैं"।
Statement on announcement made by the US Department of Labour ⬇️ 🔗 https://t.co/FZawXUTqcl https://t.co/67vMRyJ5EF
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) October 9, 2026
जेडी वेंस ने की थी आपत्तिजनक टिप्पणी
बता दें कि जेडी वेंस ने अपने बयान में कहा था कि "पिछले साल, माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी वर्कर्स को नौकरी से निकाल दिया। उसी समय, कंपनी को 6,300 H-1B वीज़ा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का फ़ायदा हुआ। दूसरे शब्दों में, अगर आप हिसाब लगाएं, तो माइक्रोसॉफ्ट ने जितने भी वर्कर्स को नौकरी से निकाला, उनकी जगह डेढ़ विदेशी बंधुआ मज़दूरों को रख लिया।" गौरतलब है कि वेंस के इस बयान के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच खटास बढ़ेगी।
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