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 Jamia Protest: जामिया में छात्र संघ का संविधान बनाने के लिए कमेटी गठित, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की निगरानी

Shivashakti Narayan Singh · 21 अक्टूबर 2026

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली और छात्रों के प्रतिनिधित्व को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, समिति वर्ष 2006 में छात्र संघ भंग किए जाने के कारणों, इससे जुड़े अदालती फैसलों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों की समीक्षा करेगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि वह बातचीत और आपसी विश्वास के जरिए छात्रों की मांगों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत पर नजर रखने के लिए मेडिकल टीम तैनात की गई है और प्रदर्शन स्थल पर एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई गई है।

 छात्र प्रतिनिधियों के साथ हुई कई दौर की बातचीत

जामिया प्रशासन के अनुसार, छात्रों की मांगों पर बातचीत करने के लिए 18 अक्टूबर को वरिष्ठ डीन और प्रोफेसरों की सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने 19 अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहे छात्रों से संपर्क किया और बातचीत शुरू की।

इसके बाद छात्र प्रतिनिधियों को डीन ऑफ सोशल साइंसेज के कार्यालय में चर्चा के लिए बुलाया गया। 20 अक्टूबर को हुई करीब दो घंटे की बैठक में छात्रों की शिकायतों और मांगों पर चर्चा की गई। उसी दिन शाम 6:30 बजे डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर के कार्यालय में एक और बैठक हुई, जिसका उद्देश्य बातचीत के ब्योरे को औपचारिक रूप देना था। प्रशासन का कहना है कि बैठक में छात्रों के प्रमुख सुझावों को शामिल किया गया, लेकिन कई दौर की चर्चा के बावजूद छात्र बैठक के मिनट्स पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत नहीं हुए। इसके बाद भी विश्वविद्यालय ने बातचीत जारी रखने और विवाद का समाधान खोजने की बात कही है।

 छात्र संघ का संविधान बनाने के लिए बनेगी समिति

कुलपति प्रो. मजहर आसिफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न संकायों के डीन ने हिस्सा लिया। बैठक में उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों और छात्रों के साथ हुई बातचीत की समीक्षा की गई।

इसके बाद विश्वविद्यालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम, 1988 की धारा 23(J) और (K) के तहत छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति 2006 में छात्र संघ भंग किए जाने की परिस्थितियों, छात्र संघ से संबंधित अदालती फैसलों और 2007 की लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करेगी। साथ ही, विश्वविद्यालय के मौजूदा नियमों, अध्यादेशों और छात्र संघ चुनावों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी समीक्षा की जाएगी।

 2006 से लंबित है छात्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जामिया में छात्र संघ को 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद से छात्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। प्रशासन का कहना है कि पिछले दो दशकों में कानूनी और संस्थागत परिस्थितियों में कई बदलाव हुए हैं, इसलिए छात्र संघ की बहाली से जुड़े मामले की व्यापक समीक्षा जरूरी है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर समाधान निकालते समय जामिया अधिनियम, लागू नियमों, अदालतों के आदेशों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखा जाएगा।

 भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के लिए मेडिकल टीम तैनात

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सेहत को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. इरशाद हुसैन नकवी की निगरानी में मेडिकल टीम तैनात की है। यह टीम भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रदर्शन स्थल पर एंबुलेंस भी रखी गई है।

गेट नंबर 18 पर प्रदर्शन की जगह तय

जामिया प्रशासन ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करता है। इसी के तहत छात्रों के प्रदर्शन के लिए गेट नंबर 18 निर्धारित किया गया है। हालांकि, प्रशासन के मुताबिक, छात्र 12 अक्टूबर से गालिब लॉन में प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने गालिब की ऐतिहासिक प्रतिमा, गेट नंबर 7 सहित अन्य प्रवेश द्वारों, दीवारों और इमारतों पर हुई कथित तोड़फोड़ और लिखावट पर भी चिंता जताई है। प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे विरोध के अपने अधिकार का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करें और विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत तथा संपत्ति की रक्षा करें।

 

Reported By- M. Atharuddin Munne Bharti