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जयशंकर का बड़ा बयान- अमेरिका ने खुद को बनाया ‘Lonelier Power’, चीन के उभार से बदल रहा ग्लोबल ऑर्डर

Shivashakti Narayan Singh · 4 अक्टूबर 2026
जयशंकर का बड़ा बयान

S Jaishankar: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को बदलती वैश्विक राजनीति को लेकर कई अहम बातें कहीं। नई दिल्ली में आयोजित Munich Leaders Meeting में बोलते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मुख्य रूप से अमेरिका के बदले रुख और चीन के बढ़ते प्रभाव ने प्रभावित किया है।

जयशंकर ने अमेरिका की मौजूदा स्थिति को ‘radical repositioning’ यानी बड़े बदलाव वाला रुख बताया। उनके मुताबिक अमेरिका ने यह बदलाव अपनी पसंद से किया है और इसी वजह से वह एक तरह से खुद को ‘lonelier power’ बना चुका है।उन्होंने कहा कि दूसरी बड़ी बात चीन का लगातार बढ़ता प्रभाव है। चीन खुद को एक अलग और विशिष्ट शक्ति के तौर पर देखता है और उसकी आर्थिक एवं राजनीतिक क्षमता भी उसे वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाती है।

US-China की होड़ का असर दूसरे देशों पर भी

जयशंकर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि इस प्रतिस्पर्धा ने दुनिया के अलग-अलग देशों के पास मौजूद प्रभाव और ताकत को भी एक तरह से ‘weaponization’ की दिशा में धकेला है। यानी आर्थिक, रणनीतिक या दूसरे तरह के दबाव के साधनों का इस्तेमाल अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनता जा रहा है।

Quad से BRICS तक, अलग-अलग मोर्चों पर सहयोग

जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियां अपने हितों के हिसाब से एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि जहां सीधे हितों का टकराव नहीं है, वहां ये देश आपसी सहयोग के साथ-साथ अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।उन्होंने Quad का उदाहरण दिया। इसके अलावा कनेक्टिविटी के क्षेत्र में India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC), International North-South Transport Corridor (INSTC) और Northern Sea Route का भी जिक्र किया।

भारत की पहल वाले संगठनों का भी किया जिक्र

विदेश मंत्री ने International Solar Alliance और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) का भी उल्लेख किया। दोनों पहलों में भारत की अहम भूमिका रही है।उनके मुताबिक आज कई देश किसी एक बड़े शक्ति केंद्र के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय अपने हितों के आधार पर अलग-अलग देशों और संगठनों के साथ सहयोग के रास्ते तलाश रहे हैं।जयशंकर ने कहा कि देश अपने हितों के हिसाब से काम करने की व्यवस्था बना रहे हैं, एजेंडा तय कर रहे हैं और सहयोग के नए तरीके विकसित कर रहे हैं। उनके अनुसार यही मौजूदा समय में विकसित हो रही वैश्विक व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता है।

दुनिया तेजी से बढ़ रही है Multipolarity की ओर

जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में multipolarity यानी कई शक्ति केंद्रों के उभरने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि आने वाले दौर में देशों के लिए ऐसे कई खिलाड़ियों के साथ संबंध रखना जरूरी हो सकता है, जिनके हित हर मुद्दे पर एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।उन्होंने इसे रणनीतिक रूप से आगे बढ़ने के लिए ‘hedging’ की स्थिति बताया।जयशंकर ने यह भी कहा कि इस बदलती व्यवस्था का असर बहुपक्षीय संस्थाओं पर पड़ेगा। उनके मुताबिक संयुक्त राष्ट्र जैसी प्रमुख बहुपक्षीय संस्था पर पहले से ही दबाव दिखाई दे रहा है और वहां कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।