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7 महीने की जंग... फिर आया वो फैसला, 'कुंभ वायरल गर्ल' मोनालिसा की आंखों में छलके आंसू; जानिए क्या है पूरा मामला?

Shailesh Yadav · 2 अक्टूबर 2026
मोनालिसा को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी


नई दिल्ली: महाकुंभ 2025 से सोशल मीडिया पर वायरल हुईं मोनालिसा भोंसले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने मोनालिसा के पुराने जन्म प्रमाणपत्र को रद्द करने वाले महेश्वर नगर पालिका के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि जन्म रिकॉर्ड में बदलाव से पहले मोनालिसा को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने उनकी जन्मतिथि को अंतिम रूप से तय नहीं किया है और मामले पर नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए हैं।

सात महीने की कानूनी लड़ाई के बाद मोनालिसा ने ली राहत की सांस
फैसले के बाद ANI से बातचीत में मोनालिसा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से भरोसा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं और आखिरकार उन्हें न्याय मिला है। मोनालिसा ने कहा कि पिछले करीब सात महीने उनके और उनके पति के लिए बेहद मुश्किल रहे। आर्थिक परेशानियों के साथ-साथ उनके कई काम और फिल्म प्रोजेक्ट भी रुक गए थे। उन्होंने अपने वकीलों और उन लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। मोनालिसा ने कहा कि वह और उनके पति अब केरल में बसने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने केरल के लोगों के समर्थन के लिए भी आभार जताया।

जन्म प्रमाणपत्र को लेकर क्या था पूरा विवाद?
मामला मोनालिसा की जन्मतिथि से जुड़े दो अलग-अलग रिकॉर्ड सामने आने के बाद शुरू हुआ। जून 2025 में उनके माता-पिता की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज की गई थी। इसके बाद शादी के बाद उनके पिता की ओर से दावा किया गया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को महेश्वर के स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था। इसके आधार पर एक अस्पताल रिकॉर्ड नगर निकाय के सामने पेश किया गया और पहले वाले जन्म रिकॉर्ड को रद्द कर नई जन्मतिथि दर्ज कर दी गई।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया नगर पालिका का आदेश?
इंदौर बेंच ने कहा कि मोनालिसा के जन्म रिकॉर्ड में बदलाव का सीधा असर उनके अधिकारों और कानूनी स्थिति पर पड़ता था। ऐसे में उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी था।

कोर्ट ने इसी आधार पर महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी का आदेश रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से देखने का निर्देश दिया। अधिकारी को मोनालिसा को प्रभावी सुनवाई का अवसर देने के बाद उनके पिता की ओर से दिए गए आवेदन पर कानून के अनुसार फैसला करने को कहा गया है।

आधार कार्ड में भी दर्ज है 1 जनवरी 2008
कोर्ट के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि मोनालिसा के 28 मई 2015 को जारी आधार कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है। इसके अलावा जनवरी 2026 में उनका PAN भी जारी हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने यह नहीं कहा कि इनमें से कौन-सी जन्मतिथि अंतिम रूप से सही है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड सामने नहीं है, जिससे विवाद का आसानी से निपटारा हो सके।

पति ने भी फैसले पर जताई खुशी
मोनालिसा के पति फार्मन ने भी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने अपने वकीलों विवेक टांक और जेरी लोपेज का धन्यवाद किया और कहा कि पिछले सात महीने उनके लिए आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन रहे। उनका कहना था कि विवाद के कारण लोग उनके साथ काम करने से डर रहे थे, जबकि उनके पास कई प्रोजेक्ट थे। अब कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि रुके हुए काम दोबारा शुरू हो सकेंगे।

महाकुंभ से मिली थी पहचान
मोनालिसा भोंसले महाकुंभ 2025, प्रयागराज के दौरान रुद्राक्ष की माला बेचते हुए सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद उन्हें फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में भी काम मिलने लगा। बाद में उन्होंने केरल में अपने साथी फार्मन खान से शादी की। इस शादी के बाद उनकी उम्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ और उनके पति के खिलाफ नाबालिग से जुड़े आरोपों पर मामला भी सामने आया।

अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ जन्मतिथि विवाद
हाईकोर्ट का आदेश मोनालिसा के लिए बड़ी कानूनी राहत जरूर है, लेकिन इसे उनकी जन्मतिथि पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने केवल जन्म प्रमाणपत्र रद्द करने की प्रक्रिया को उचित सुनवाई के अभाव में खारिज किया है और संबंधित अधिकारी को मामले पर नए सिरे से निर्णय लेने को कहा है। यानी अब आगे की प्रक्रिया में यह तय किया जाना बाकी है कि रिकॉर्ड में उनकी सही जन्मतिथि क्या दर्ज की जानी चाहिए।