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Kalpasar Project: भारत-नीदरलैंड के बीच जल सहयोग बढ़ा, गुजरात के मेगा प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ी साझेदारी

Pradeep Singh · 25 सितम्बर 2026
कालसर प्रोजेक्ट

नई दिल्ली: भारत और नीदरलैंड ने जल क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए गुजरात के कालसर (Kalpasar) प्रोजेक्ट के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौते 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक (IIWW) 2026 के दौरान नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुए। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के उप मंत्री जाप स्लूटमेकर ने की।

कालसर प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग

भारत के सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC), गुजरात सरकार के कालसर विभाग और नीदरलैंड की जल विशेषज्ञ संस्थाओं Deltares और TU Delft के बीच त्रिपक्षीय MoU साइन किए गए हैं।

इन समझौतों के तहत प्रोजेक्ट की योजना, डिजाइन, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमता निर्माण में नीदरलैंड की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा।

क्या है कालसर प्रोजेक्ट?

कालसर प्रोजेक्ट का उद्देश्य गुजरात में एक बड़े मीठे पानी के जलाशय का निर्माण करना है। इसके लिए साबरमती, माही और धाधर नदियों के अतिरिक्त जल प्रवाह को संग्रहित करने और नर्मदा नदी से पानी पहुंचाने की योजना है।

केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि यह समझौते दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करेंगे और प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन में मददगार साबित होंगे।

नीदरलैंड की तकनीक से मिलेगा फायदा

नीदरलैंड जल प्रबंधन और तटीय सुरक्षा तकनीकों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। बैठक में नीदरलैंड के अधिकारियों ने परियोजना का उदाहरण देते हुए जल प्रबंधन, तटीय सुरक्षा और इंजीनियरिंग अनुभव साझा करने की बात कही।

MoU के तहत हाइड्रोलिक मॉडलिंग, बाढ़ सुरक्षा, तटीय इंजीनियरिंग, जलवायु अनुकूलन, डिजिटल तकनीक और पर्यावरणीय समाधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा के बाद बढ़ा सहयोग

सीआर पाटिल ने बताया कि कालसर प्रोजेक्ट पर तकनीकी सहयोग को लेकर चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2026 में हुई नीदरलैंड यात्रा के दौरान भी हुई थी। इसके बाद 16 मई 2026 को तकनीकी सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे।

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