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भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू! भारतीय निर्यातकों से छात्रों तक किसे होगा कितना फायदा?

MADHVI TANWAR · 20 अक्टूबर 2026
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू

India New Zealand FTA: आज देश के लोगों को त्योहार के सीजन में बड़ी खुशखबरी मिली है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 यानी विजयादशमी के अवसर पर आधिकारिक तौर से लागू हो गया है। इसकी घोषणा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने की। भारत से न्यूजीलैंड में होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात पर आयात शुल्क पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

इससे चमड़ा, जूते-चप्पल, कपड़े, टेक्सटाइल, दवाएं और इंजीनियरिंग उत्पाद बगैर बिना किसी शुल्क के ही भारत पहुंचेंगे। न्यूजीलैंड से भारत आने वाले 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती की जाएगी। वाइन जैसे उत्पादों पर शुल्क धीरे-धीरे कम होगा। सेब और कीवी पर दूसरे साल से रियायतें मिलेंगी।

भारतीय व्यापारियों के लिए खुले रास्ते

भारतीय वस्तुओं के लिए शून्य शुल्क पहुंच और नए वीजा मार्ग उपलब्ध हुए। ऐसे में भारतीय व्यापारियों के लिए भी काफी बड़ा ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव खुल गया है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता आज से लागू होने के बाद भारत को बड़ी राहत मिली है। यह 17वां परिचालन मुक्त व्यापार समझौता है। जो भारतीय निर्यातकों, छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलता है।

इन्हें मिलेगा इसका सीधा लाभ

इस समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड सभी भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। जिससे बाद वस्त्र, परिधान, चमड़ा, कालीन, सिरेमिक, इंजीनियरिंग सामान और ऑटोमोटिव पुर्जों जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। यह समझौता भारत को न्यूजीलैंड के सेवा बाजार तक व्यापक पहुंच प्रदान करता है। भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए आवागमन के नए रास्ते खोलता है।

27 अप्रैल 2026 को समझौते पर हुए थे हस्ताक्षर

जीटीआरआई की रिपोर्ट द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक सभी भारतीय सामान अब न्यूजीलैंड में शून्य आयात शुल्क पर आयात करेंगे। जो भारतीय निर्यातकों के लिए तत्काल टैरिफ लाभों को उजागर करता है। 27 अप्रैल 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसपर साल 2010 में चर्चा शुरू हुई थी। लेकिन साल 2015 में इस पर चर्चा रुक गईं। इसके बाद साल 2025 के मार्च महीने में फिर से शुरू हुई। सेवाओं के क्षेत्र में, न्यूजीलैंड ने सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और दूरसंचार सहित 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं जताई हैं।

भारतीय छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

भारतीय छात्रों को प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम करने की अनुमति होगी, जबकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री धारक तीन साल के पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के लिए पात्र होंगे। डॉक्टरेट धारक 4 साल के पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के लिए पात्र होंगे। समझौते में भारतीय छात्रों और कुशल पेशेवरों की आवाजाही को लेकर भी प्रावधान हैं।

न्यूजीलैंड में योग्य भारतीय पेशेवरों के लिए एक समय में अधिकतम 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा धारकों की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, 18 से 30 वर्ष के भारतीय नागरिकों के लिए सालाना 1,000 स्थानों वाली वर्किंग हॉलिडे योजना दो साल के भीतर शुरू की जानी है। पात्र भारतीय STEM स्नातकों को पढ़ाई के बाद तीन साल तक और डॉक्टरेट धारकों को चार साल तक पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के अवसर मिल सकते हैं। इन लाभों के लिए संबंधित वीजा और पात्रता शर्तें लागू होंगी।

आईटी सेक्टर को होगा बड़ा फायदा

इस समझौते के तहत किसी भी समय अधिकतम 5,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को 3 साल तक के लिए अस्थायी रोजगार का अवसर भी प्रदान किया गया है। विशेष रूप से आईटी, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्रों में। इसके अतिरिक्त, वर्क एंड हॉलिडे योजना के तहत प्रतिवर्ष अधिकतम 1,000 युवा भारतीय न्यूजीलैंड में 12 महीने तक रह और काम कर सकेंगे।

भारत का बाजार होगा गुलजार

सेवाएं और आवागमन भारत के लिए बड़े लाभ ला सकते हैं। जो माल व्यापार से परे संभावित लाभों की ओर इशारा करता है। हालांकि, इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यात के लिए भारत के बाजार के कुछ हिस्से भी खुल जाते हैं, क्योंकि भारत लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर रियायतें दे रहा है। जो न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात को कवर करती हैं। समझौते से न्यूजीलैंड से आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम होंगे या समाप्त होंगे।

इससे भारतीय कारोबारियों को कच्चे माल और अन्य इनपुट की लागत में राहत मिल सकती है, लेकिन कुछ घरेलू उत्पादकों को बढ़ते आयात से प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए इसके फायदे हर क्षेत्र में एक जैसे नहीं होंगे। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय वस्तु एवं सेवा व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 35,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

डेयरी क्षेत्रों में आएगी बहार

डेयरी उत्पाद,चीनी और खाद्य तेल टैरिफ रियायतों से बाहर रहेंगे, जबकि सेब, कीवी, मानुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे उत्पादों को निर्दिष्ट कोटा या अन्य शर्तों के अधीन रियायतें मिलेंगी। वर्ष 2025 में द्विपक्षीय वस्तुओं का व्यापार लगभग 1.23 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारतीय निर्यात 651.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात 575.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

पिछले कई वर्षों में हुआ 1 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश

समझौते में न्यूजीलैंड द्वारा 15 वर्षों में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। हालांकि, जीटीआरआई ने कहा कि यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी बना हुआ है, क्योंकि पिछले 25 वर्षों में भारत में न्यूजीलैंड का कुल निवेश 1 अरब अमेरिकी डॉलर से भी कम रहा है। यह समझौता गहन सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।

यह भी जोड़ा गया है कि मजबूत परिवहन संपर्क, सरल अनुपालन प्रक्रियाएं, योग्यताओं की मान्यता और व्यावसायिक साझेदारी बाजार पहुंच को वास्तविक व्यापार और निवेश लाभ में बदलने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

भारतीय निर्यातकों के सामने आई थी चुनौतियां

दरअसल भारतीय निर्यातकों के सामने मौजूद लगातार चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनमें कड़े खाद्य सुरक्षा मानक, प्रमाणीकरण लागत, उच्च माल ढुलाई शुल्क और लंबी शिपिंग अवधि शामिल हैं। इसलिए समझौते का पूरा प्रभाव न केवल शुल्क में कटौती पर निर्भर रहेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर होगा कि व्यवसाय नए बाजार पहुंच और सेवा अवसरों का कितनी प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं।

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