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नई दिल्ली: दुश्मन देशों को भारत का रणनीतिक संदेश! सैन्य तालमेल मजबूत करने में इंडिया ने हासिल किया नया कीर्तिमान, सदमे में पाक-चीन

Anurag Kumar Tripathi · 17 अक्टूबर 2026
नई दिल्ली

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास तरंग शक्ति 2026 ने भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया है। सबसे खास बात रही कि इस अभ्यास में 5वीं पीढ़ी का विमान F-35 का लड़ाकू विमान शामिल था। इसके अलावा कई देशों के सेनाओं ने इस युद्धअभ्यास में हिस्सा लिया था।

वहीं अब रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में लगा हुआ है, जिससे पाक-चीन जैसे की नींद उड़ सकती है।

रक्षा के क्षेत्र में भारत का नया कीर्तिमान

द डिप्लोमैट' की एक रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि रूसी मूल के जेट के साथ अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का उड़ान भरना, भारत की बहुआयामी विदेश नीति और सैन्य संबंधों का प्रमाण है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेजबान देश (भारत) ने इस मौके का इस्तेमाल मेहमानों को मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' के नतीजों के बारे में जानकारी देने के लिए किया। इस ऑपरेशन से सैन्य योजनाकारों को कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं।

भारतीय वायु सेना द्वारा 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक भारत की पश्चिमी सीमाओं के पास जोधपुर में आयोजित 'तरंग शक्ति' नामक बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास में सात मित्र देशों (FFCs) की वायु सेनाएं शामिल हुईं। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका शामिल थे। इसके अलावा, 32 अन्य देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में इसमें हिस्सा लिया।

5वीं पीढ़ी के विमानों ने लिया हिस्सा

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के F-35 जेट ने पहली बार भारतीय आसमान में उड़ान भरी। ये विमान भारतीय वायु सेना के विभिन्न लड़ाकू विमानों—जैसे LCA, राफेल, SU-30MKI, मिराज 2000, मिग-29, जगुआर—के साथ-साथ फ्रांस के राफेल और UAE के F-16 विमानों के साथ मिलकर अभ्यास में शामिल हुए।

इनके साथ A-400M और C-130/C-130J परिवहन विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर, G-6000 और अन्य सहायक प्लेटफॉर्म भी मौजूद थे। अभ्यास के बाद के आंकड़ों का हवाला देते हुए, भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी ने बताया कि 'तरंग शक्ति' के दौरान 800 से अधिक सॉर्टी (उड़ानें) पूरी की गईं और कुल 600 घंटे की उड़ान भरी गई।