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ज्ञानेश कुमार को लेकर BJP और कांग्रेस आमने-सामने, शमीक बोले- 'पद्म भूषण मिलना चाहिए'

Shivashakti Narayan Singh · 26 सितम्बर 2026
पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण की मांग की

CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम पद्म भूषण मिलना चाहिए।

ANI के मुताबिक, उत्तर 24 परगना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने शांतिपूर्ण चुनाव कराने और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की दिशा में काम किया है।

'लोगों ने बिना डर के वोट डाला'

शमीक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया का जिक्र करते हुए दावा किया कि लोगों को बिना डर और दबाव के मतदान करने का मौका मिला।उन्होंने यह भी दावा किया कि सीमा से लगे राज्य में मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने की दिशा में ज्ञानेश कुमार ने पहल की।यह BJP नेता का राजनीतिक दावा है। SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

शमीक भट्टाचार्य ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर भी कई लोग राहुल गांधी की बातों को गंभीरता से नहीं लेते।उन्होंने ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण की मांग करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोगों ने लंबे समय बाद ऐसा चुनाव देखा, जिसमें उनके मुताबिक हिंसा और डर का माहौल नहीं था।

कांग्रेस कर रही CEC के खिलाफ प्रदर्शन

दूसरी ओर, कांग्रेस ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया। 25 सितंबर को दिल्ली समेत कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।कांग्रेस का यह विरोध मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच हो रहा है। दिल्ली में भी कांग्रेस ने CEC के खिलाफ पोस्टर लगाए और उनके हटाए जाने की मांग की।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

SIR को लेकर विवाद तब और बढ़ा जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के भीतर कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता डेटा तक पहुंच और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।वहीं चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि संस्थागत विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और हाल के आदेश निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं।इस पूरे विवाद के बीच BJP जहां CEC के कामकाज का बचाव कर रही है, वहीं कांग्रेस SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रही है।