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लॉरेंस बिश्नोई का बदल गया ठिकाना! 2008 बम धमाकों के दोषियों वाली जेल में आखिर क्यों किया शिफ्ट?

MADHVI TANWAR · 27 अक्टूबर 2026
लॉरेंस बिश्नोई की क्यों बदली जेल?

Gujrat News: देश के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात के साबरमती जेल में शिफ्ट कर दिया है। लॉरेंस को जेल के ब्लॉक 200 में शिफ्ट किया गया है। यह वहीं ब्लॉक है जहां पर साल 2008 में हुए बम धमाकों के दोषी रहते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लॉरेंस बिश्नोई की जेल शिफ्ट करने के पीछे आखिर क्या वजह है? क्या जेल प्रशासन ने किसी बड़ी साजिश को रोकने के लिए ऐसा करा है?

जहां रहते हैं आतंकी व कुख्यात अपराधी

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के एक खास हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में भेज दिया गया है, जहां आतंकवाद और दूसरे गंभीर अपराधों के 200 कैदी रखे गए हैं । इस ब्लॉक को “दो सौ खोली” या “ब्लॉक 200” के नाम से जाना जाता है, इसे चार अलग-अलग सेक्शन में बांटा गया है, हर सेक्शन में 50 कैदी रह सकते हैं, ताकि कैदियों को एक सेल से दूसरे सेल में जाने से रोका जा सके और उन्हें पूरी तरह से अलग रखा जा सके। बिश्नोई का सेल लगभग 7.5 फीट गुणा 11 फीट का है।

हाई-सिक्योरिटी विंग में भेजा

यह ट्रांसफर एक बड़े सिक्योरिटी इंतज़ाम का हिस्सा है जिसका मकसद गैंगस्टर की बाहरी दुनिया से बातचीत करने और सलाखों के पीछे से अपने क्रिमिनल नेटवर्क को कंट्रोल करने की काबिलियत को रोकना है। अब उसे और भी ज्यादा सुरक्षित और अलग रखने के लिए बड़े हाई-सिक्योरिटी विंग में भेजा गया है। आपराधिक नेटवर्क और सिंडिकेट को तोड़ना: लॉरेंस बिश्नोई पर जेल के अंदर से ही मोबाइल और इंटरनेट के जरिए अपना रंगदारी और धमकियों का नेटवर्क चलाने के आरोप लगते रहे हैं। इस नई शिफ्टिंग का मुख्य उद्देश्य उसके बाहरी संपर्क को पूरी तरह काटना और उसके 'पंख कतरना' है।

पहले बिश्नोई को “10 खोली” में रखा

ब्लॉक 200 में 2008 के बम धमाकों के दोषी और दूसरे हाई-रिस्क कैदी रहते हैं। ब्लॉक 200 साबरमती सेंट्रल जेल का एक मैक्सिमम-सिक्योरिटी सेक्शन है। यहीं पर साल 2008 में हुए अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषियों के साथ कई अन्य बड़े क्रिमिनल केस से जुड़े कुख्यात अपराधी को रखा जाता है। यह सेक्शन उन कैदियों के लिए है जिन पर जेल के बाहर आने-जाने पर कड़ी पाबंदियां हैं, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 भी शामिल है। अपनी नई जेल शिफ्ट से पहले बिश्नोई को “10 खोली” में रखा गया था, जो एक छोटा हाई-सिक्योरिटी जोन है। जिसे सिर्फ़ 10 कैदियों के लिए बनाया गया है। उन्हें पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल और पंजाब की कई जेलों में रखा गया था।

बाहरी दुनिया से कम्युनिकेशन होगा कंट्रोल

अलग-अलग जेलों में अपनी पिछली सज़ाओं के दौरान, बिश्नोई के रिकॉर्डेड कॉल सामने आए थे, जिनमें उसने कथित तौर पर कॉल सेंटर मालिकों को धमकाया था। उसके और गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी के बीच कथित बातचीत भी सामने आई थी। बिश्नोई का बाहरी दुनिया से कम्युनिकेशन तब से ज़्यादा टाइट कंट्रोल में आ गया है। 2023-24 से पहले, वह रेगुलर तौर पर एक्सटॉर्शन कॉल करता था और अपने नेटवर्क को मैनेज करने के लिए धमकी भरे ऑडियो और वीडियो मैसेज भेजता था। उसने अलग-अलग जेलों से इंटरव्यू भी दिए थे। इन्वेस्टिगेटर्स ने बताया है कि पिछले दो सालों में उससे कोई डायरेक्ट कॉल या कम्युनिकेशन नहीं हुआ है।

24 घंटे सख्त निगरानी

लॉरेंस बिश्नोई को इस ब्लॉक की करीब 7.5x11 फीट की एक छोटी कोठरी में रखा गया है। वह यहां चौबीसों घंटे कड़े पहरे और सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में रहेगा, जहां उसे किसी भी बाहरी व्यक्ति से मिलने की इजाजत नहीं होगी। अदालत की तारीखें भी केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही पूरी की जा रही हैं।

कैदियों की आवाजाही पर पूर्ण रोक

'दो सौ खोली' ब्लॉक को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें प्रति सेक्शन केवल 50 कैदी रखे जाते हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कैदी एक-दूसरे की सेल या ब्लॉक में न आ-जा सकें और किसी भी तरह की गुटबाजी या साजिश को रोका जा सके।

हनुमान चालीसा पढ़ता है और रखता है व्रत

बिश्नोई चौबीसों घंटे निगरानी में हैं, लेकिन उसके बावजूद उसकी फिजिकल बातचीत और डिजिटल एक्सेस बहुत कम है। कहा जाता है कि बाहरी दुनिया से उनका संपर्क वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट की कार्रवाई और अपने वकील के साथ कानूनी रणनीति पर चर्चा तक ही सीमित है। अपने सेल के अंदर, वह कथित तौर पर एक अनुशासित रूटीन फॉलो करता हैं। सुबह मेडिटेशन के बाद हनुमान चालीसा पढ़ता हैं, व्रत रखता है और शाकाहारी खाना खाता हैं। हालांकि, उनके कथित आइसोलेशन से उनके बड़े सिंडिकेट के ऑपरेशन रुके नहीं हैं। कहा जाता है कि नेटवर्क एक डीसेंट्रलाइज़्ड चेन ऑफ़ कमांड के ज़रिए काम करता है, जिसमें सीनियर साथी विदेश में सुरक्षित ठिकानों से गतिविधियों को कोऑर्डिनेट करता हैं।

फाइनेंसिंग और टारगेट चुनने का काम संभालना

एक ग्रुप जिसे “शैडो कैबिनेट” कहा जाता है, कथित तौर पर रोज़ाना के ऑपरेशन देखता है। जिसमें भर्ती, काम सौंपना और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। सदस्य स्क्रीनशॉट भी शेयर करते हैं, जबकि एक पैरेलल ग्रुप प्लानिंग, फाइनेंसिंग और टारगेट चुनने का काम संभालता है। माना जाता है कि विदेश से ऑपरेट करने वाले मुख्य लोगों में गोल्डी बरार और रोहित गोदारा शामिल हैं। खबर है कि FBI के ऑपरेशन हार्डबॉल के बाद दोनों अंडरग्राउंड हो गए हैं।

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