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Election Commission: SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा दावा, सुप्रीम कोर्ट में कहा- तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए

Shailesh Yadav · 26 अक्टूबर 2026
SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा दावा

SIR Controversy: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा है कि 2025 और 2026 में SIR को लेकर जारी किए गए तीनों आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से पारित हुए थे। आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया है। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' आयोजित करने का कार्यक्रम बनाया है।

SIR के तीनों आदेशों पर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और फैसले लेने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में काउंटर-अफिडेविट दाखिल किया है। इसमें आयोग ने कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए SIR संबंधी तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए फैसले थे। आयोग के मुताबिक, ये निर्देश किसी एक अधिकारी का एकतरफा फैसला नहीं थे, बल्कि संवैधानिक संस्था के सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े अंतिम निर्णयों को कानूनी आधार प्राप्त है।

फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर आयोग की सफाई
मतदाता सूची में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर भी विवाद सामने आया था। हलफनामे में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के तीनों आदेशों के जरिए फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग ने अपने जवाब में कहा कि फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने का आरोप सही नहीं है। यह सफाई ऐसे समय आई है, जब विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

SIR पर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब 23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों पर आपत्ति जताई, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।

रिपोर्ट में मतदाता सूची के ERONET डेटाबेस के केंद्रीकरण, नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में कथित बदलाव और SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में आंतरिक तकनीकी टिप्पणियां और लिखित सवाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग का दावा है कि SIR से जुड़े अंतिम आदेश सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए।

30 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन महाभियोग'
SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विरोध के बीच INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' आयोजित करने की योजना बनाई है। कार्यक्रम के तहत उनके पद से हटाने की मांग के समर्थन में सार्वजनिक फैसला सुनाए जाने की बात कही गई है। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'दिल्ली चलो' मार्च प्रस्तावित है। विपक्षी दल SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

भाजपा और विपक्ष के बीच SIR पर सियासी टकराव
SIR की प्रक्रिया को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग जहां इसकी वैधता और पारदर्शिता का बचाव कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की समीक्षा और जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर रहेगी। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में तीनों आदेशों को सर्वसम्मत बताया है, जबकि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों और विपक्ष के आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया के दौरान विचार किया जाना बाकी है। 

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