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Dussehra 2026 Date: 20 या 21 अक्टूबर, कब है दशहरा? तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन

Shivashakti Narayan Singh · 13 अक्टूबर 2026
इस साल कब है दशहरा?

Dussehra 2026: दशहरा यानी विजयादशमी की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि इस साल पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 21 अक्टूबर को। दशमी तिथि दोपहर में शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। जानिए दशहरा की तारीख, पूजा का समय और इस पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

नवरात्रि के समापन के साथ ही दशहरे की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। इस दिन देशभर में रावण दहन किया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, दशहरा अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

साल 2026 में दशमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों के बीच पर्व की तारीख को लेकर भ्रम है। ऐसे में तिथि के साथ पूजा और रावण दहन के समय को समझना जरूरी है।

दशहरा 2026 की सही तारीख क्या है?

दिए गए पंचांग विवरण के मुताबिक, अश्विन शुक्ल दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर बताया गया है। इस विवरण के अनुसार, दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाने की बात कही गई है। हालांकि, दशहरा मनाने की तारीख तय करते समय स्थानीय पंचांग, दशमी तिथि और अपराह्न काल में तिथि की मौजूदगी जैसे नियमों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय मंदिर की घोषणा से तारीख की पुष्टि कर लें।

दशहरे पर रावण दहन कब किया जाएगा?

विजयादशमी के दिन रावण दहन का आयोजन आमतौर पर शाम के समय किया जाता है। इसकी वजह प्रदोष काल में रावण दहन की परंपरा है। 20 अक्टूबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक,अपराह्न पूजा: दोपहर 1:14 से शाम 3:30 बजे तक
व प्रदोष काल की शुरुआत: शाम 5:47 बजे से होगी।

विजयादशमी पर कैसे करें पूजा?

दशहरे के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु भगवान को धूप-दीप दिखाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुछ स्थानों पर गाय के गोबर से दस गोले बनाकर उन पर जौ के बीज लगाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन गोलों को अहंकार, लोभ और लालच जैसी बुराइयों का प्रतीक माना जाता है। इन्हें जलाने के पीछे अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को खत्म करने का भाव जुड़ा है। दशहरे के दिन कई जगह शस्त्र पूजा भी की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराएं स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार बदल सकती हैं।

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