दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान 15 पुलिसकर्मी घायल, 110 हिरासत में; महिला पुलिसकर्मियों को भी काटने का आरोप
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान करीब 15 दिल्ली पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। बताया गया कि कुछ महिला पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने काट लिया। इस मामले में पुलिस ने करीब 110 लोगों को हिरासत में लिया है।
इससे पहले इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को कथित तौर पर संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पुलिस बैरिकेडिंग के बीच मार्च
IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में सैकड़ों युवा कार्यकर्ता मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं और वे केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मार्च के मद्देनजर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और रास्ते में बैरिकेडिंग की गई थी।
ANI से बातचीत में उदय भानु चिब ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने से रोके जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल जंतर-मंतर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
चिब ने केंद्र सरकार पर ग्यानेेश कुमार को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अब इस मुद्दे से जुड़े और तथ्य सामने आ रहे हैं।
IYC नेताओं ने की इस्तीफे की मांग
IYC की राष्ट्रीय सचिव रोशनी जायसवाल ने भी सरकार पर मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितने प्रयास कर ले, ज्ञानेश कुमार को बचाया नहीं जा सकेगा। वहीं, IYC लीगल टीम के राष्ट्रीय समन्वयक चितवन गोदारा ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय होने तक उनका संगठन प्रदर्शन जारी रखेगा।
चुनाव आयोग ने संस्थागत मतभेद के दावे को नकारा
यह पूरा विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ, जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और आयोग की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को अंतिम फैसलों को लेकर किसी तरह के संस्थागत मतभेद का संकेत मानने से इनकार किया है। आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट चरण में प्रशासनिक सवाल, सुझाव और इनपुट देना उसकी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्यक्रम से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इस बीच, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद राजधानी में चुनाव आयोग और SIR को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।
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