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एक बैंक खाते ने खोल दी डिजिटल अरेस्ट ठगी की कड़ी, पांच राज्यों में बचाए 1.53 करोड़; ठगों ने बुजुर्गों को ऐसे बनाया निशाना

Shivashakti Narayan Singh · 18 अक्टूबर 2026
जानिए डिजिटल अरेस्ट के बारे में

Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले लोगों का तरीका एक जैसा हो सकता है, लेकिन उनकी गिरफ्त में आए हर व्यक्ति की कहानी अलग होती है। कोई खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले शख्स की गिरफ्तारी की धमकी से डर जाता है, तो कोई अपने आधार कार्ड को किसी गंभीर अपराध से जोड़ दिए जाने के दावे पर भरोसा कर बैठता है। दिल्ली पुलिस की एक टीम ने ऐसे ही मामलों में पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़कर पांच राज्यों में संभावित रूप से करीब 1.53 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ठगी रुकवाने का दावा किया है। आइए जानते हैं इस लेख में विस्तार से।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, फाइनेंशियल मॉनिटरिंग सेल (FMC) की प्रॉएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम ने संदिग्ध बैंक खातों और पैसों के लेनदेन का विश्लेषण किया। इस दौरान ऐसे लोगों की पहचान हुई, जो ठगों के संपर्क में थे और उनसे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे। टीम ने संबंधित पीड़ितों, बैंकों और साइबर हेल्पलाइन की मदद से आगे की रकम ट्रांसफर होने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया।

एक शिकायत से दूसरे पीड़ितों तक पहुंची पुलिस

इस कार्रवाई की शुरुआत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर मिली शिकायत से हुई। पुलिस के अनुसार, 14 सितंबर को दिल्ली के सागरपुर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को फोन आया। कॉल करने वालों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कनाडा में गलत कामों के लिए हुआ है। इसके बाद अधिकारी की वीडियो कॉल एक ऐसे व्यक्ति से कराई गई, जिसने खुद को IPS अधिकारी बताया। उसे मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। घबराए अधिकारी ने बैंक ऑफ बड़ौदा, ICICI बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। इस मामले में 29 सितंबर को ई-FIR दर्ज हुई।

बैंक खाते से हुए लेनदेन से खुला राज

पुलिस ने जब शिकायतकर्ता के ICICI बैंक खाते से हुए लेनदेन की जांच की, तो रकम हैदराबाद के एक एक्सिस बैंक खाते तक पहुंचने का पता चला। पुलिस के मुताबिक, यह खाता कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। आगे की पड़ताल में पता चला कि 21 से 29 सितंबर के बीच पांच अन्य पीड़ितों ने भी इसी खाते में पैसे भेजे थे। समय रहते उनसे संपर्क किया गया।

कहीं घर गिरवी रखने का दबाव, कहीं FD तुड़वाने की तैयारी

  • दिल्ली के नजफगढ़ में 77 वर्षीय सेवानिवृत्त एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया कर्मचारी 17 सितंबर से कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के दबाव में थे। ठग उनसे तीन लाख रुपये और मांग रहे थे। उन पर सोना-चांदी गिरवी रखने का दबाव भी बनाया जा रहा था। पुलिस की काउंसलिंग, हेल्पलाइन 1930 के जरिए सत्यापन और मौके पर पहुंची टीम की मदद से यह सिलसिला रुका। पुलिस के अनुसार, इससे करीब 3.48 लाख रुपये की संभावित अतिरिक्त ठगी टली।
  • राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, वह पहले ही 18 लाख रुपये दे चुके थे और ठग उनसे घर गिरवी रखकर 10 लाख रुपये और जुटाने को कह रहे थे। पुलिस ने राज्य की साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कराया, जिसके बाद अतिरिक्त रकम देने से उन्हें रोका गया।
  • उत्तर प्रदेश में करीब 70 साल के एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो नर्स रह चुकी हैं, को बताया गया कि उनका आधार कार्ड एक बम धमाके के मामले से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, दंपति करीब 52 लाख रुपये दे चुके थे। हस्तक्षेप के बाद उनकी 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाने की प्रक्रिया रुकवाई गई।
  • महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल सहायक कथित तौर पर 15 दिनों से डिजिटल अरेस्ट के दबाव में थे। वह लगभग 85 लाख रुपये गंवा चुके थे। पुलिस ने परिवार की फिक्स्ड डिपॉजिट को लेकर आगे की रकम मांगे जाने पर हस्तक्षेप किया और 55 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद की।
  • गुजरात में 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश समझकर 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। उन्हें कुल एक करोड़ रुपये निवेश करने के लिए राजी किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, समय पर संपर्क किए जाने से बाकी 75 लाख रुपये भेजने से उन्हें रोक लिया गया।

बुजुर्गों को निशाना बनाने में डर बना ठगों का हथियार

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इन पांच मामलों में चार पीड़ित 65 से 80 वर्ष की उम्र के थे। इनमें से कई अकेले रहते थे। ठगों ने कथित तौर पर सरकारी एजेंसियों, पुलिस अधिकारियों और गंभीर आपराधिक मामलों का डर दिखाकर लोगों को पैसे देने के लिए मजबूर किया। डिजिटल अरेस्ट के ऐसे मामलों में ठग वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। फिर पीड़ित को जांच, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लगातार संपर्क में रखते हैं। कई बार परिवार या अन्य लोगों से बात करने से भी रोकने की कोशिश की जाती है। इस दौरान पीड़ित को पैसे ट्रांसफर करने, जमा रकम निकालने या संपत्ति गिरवी रखने के लिए कहा जाता है। दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है और कोई वास्तविक सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर इस तरह पैसे जमा करने की मांग नहीं करता। ऐसे कॉल आने पर घबराकर रकम भेजने के बजाय बातचीत रोकना, बैंक से संपर्क करना और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करना जरूरी है।