दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की तीसरी जमानत याचिका खारिज की
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित ‘बड़ी साजिश’ मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मामला दर्ज है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने दोनों की जमानत अर्जियों को खारिज किया। यह तीसरी बार है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दोनों की जमानत याचिकाओं को राहत नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश का दिया हवाला
रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश में तय स्थिति को बदल नहीं सकती। उस आदेश में दोनों को जमानत के लिए संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश पारित होने के एक साल पूरे होने में से जो पहले हो, उसके आधार पर आगे बढ़ने की बात कही गई थी।
इस मामले में पहले भी दोनों की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। उमर खालिद की जमानत याचिका अक्टूबर 2022 और सितंबर 2025 में खारिज हुई थी।
2020 दिल्ली दंगा मामले में UAPA के तहत केस
पुलिस के अनुसार, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने अदालत में दोनों को कथित साजिश का ‘मास्टरमाइंड’ बताया है। यह पुलिस का आरोप है, जिसका अंतिम निर्धारण मुकदमे में होना है।
2020 के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी।
UAPA जमानत के कानूनी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में मामला
इस मामले में जमानत से जुड़े कानूनी सवाल पर मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने अलग-अलग न्यायिक विचारों को देखते हुए मामले को बड़ी पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि शरजील इमाम को अगस्त 2020 में हिरासत में लिया गया था।
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