''इंकलाब जिंदाबाद'' बोलने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ हुए निलंबित! क्या आवाज उठाने की मिली सजा?
Delhi News: इंकलाब जिंदाबाद कहना कितना गलत है यह इस बात से ही समझा जा सकता है। जब दिल्ली पुलिस के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के हाथ में निलंबित होने का कागज थमाया गया। जी हां हम बात कर रहे हैं। राजधानी दिल्ली में पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर बीते दिन पुलिसकर्मियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। इस प्रदर्शन में शामिल तो 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी हुए थे। लेकिन कार्रवाई की गाज गिरी सिर्फ एक पर और वो थे ACP मनस्वी वशिष्ठ।
सही सुना आपने यह वहीं ACP मनस्वी हैं जिन्हें प्रदर्शन के दौरान इंकलाब का नारा लगाने का खामियाजा भुगतना पड़ा। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक पुलिसकर्मी द्वारा जो नारा लगाया है वह गलत है, क्या देश में अब सरकार के खिलाफ आवाज उठाना गलत है? चलिए बताते हैं आपको पूरी खबर डिटेल के साथ।
एक महिला अधिकारी समेत 150 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ इस दिल्ली पुलिस का वो नाम बन चुके हैं, जिन्हें आज आम नागरिक और हर मीडियाकर्मी चेहरा देखकर पहचान जान जाए। वजह साफ है, खुद के ही सिस्टम पर सवाल उठाना। दरअसल दिल्ली पुलिस ने असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मनस्वी वशिष्ठ को सस्पेंड कर दिया है।
सूत्रों की माने तो यह कार्रवाई पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर हुए पुलिसकर्मियों के प्रोटेस्ट के बाद की गई। इस प्रोटेस्ट में एक महिला अधिकारी समेत 150 से भी ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हुए। प्रोटेस्ट में एसपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य अधिकारियों ने ट्रांसफर रद्द कर उन्हें पुरानी पोस्टिंग पर फिर से बहाल करने की मांग करते की थी।
प्रोटेस्ट की असली वजह क्या है?
अब आपके जहन में सवाल उठेगा कि आखिर प्रोटेस्ट की असली वजह क्या है? तो बता दें कि इस प्रोटेस्ट की जड़े शाहदरा पुलिस स्टेशन से जुड़ी है। जहां वकील ललित बंसल से हाथापाई के दौरान सिर में चोट लगी थी। घटना के बाद पुलिस स्टेशन में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई। जिसके चलते डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की।
पुरानी पोस्टिंग पर बहाली
इसके बाद मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ इंस्पेक्टर अरूण कुमार के ट्रांसफर के फैसले के बाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के वकीलों ने एफआईआर और शिकायतों पर दो महीने की जांच के आश्वासन पर अपनी हड़ताल वापस ली। वहीं, इस फैसले से दिल्ली पुलिस के निचले रैंक के कर्मियों में भारी नाराजगी फैल गई। सोमवार को प्रोटेस्ट कर रहे पुलिसकर्मियों ने दोनों अफसरों को उनकी पुरानी पोस्टिंग पर बहाल करने की मांग की।
मनस्वी वशिष्ठ ने दिल्ली पुलिस कमिश्वर अनुराग कुमार को लेटर लिखकर ओपन हाउस यानी संपर्क सभा की मांग की थी। प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों ने 'वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे' जैसे नारे लगाए और अपने अधिकारियों की पुरानी तैनाती बहाल करने की मांग की।
28 अक्तूबर को मनस्वी वशिष्ठ का किया था ट्रांसफर
दिल्ली पुलिस ने 28 अक्तूबर को मनस्वी वशिष्ठ का ट्रांसफर किया था। जो गांधी नगर में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर के तौर पर तैनात थे। उन्हें स्पेशल पुलिस यूनिॉ खॉर्म विमेन एंड चिल्ड्रन में भेजा गया। शाहदरा पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरूण कुमार का ट्रांसफर सिक्योरिटी यूनिट में कर दिया गया था।
क्या विभाग के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सजा?
3 नवंबर को उनके निलंबन की खबर सामने आई। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन में उनकी भूमिका के बाद हुई। हालांकि, निलंबन के आधिकारिक विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इसलिए यह कहना कि उन्हें केवल आवाज उठाने की वजह से सजा मिली, अभी तथ्यात्मक रूप से स्थापित नहीं है।
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