‘तीनों सहमत, फिर भी गलत फैसला गलत’, ECI के हलफनामे पर इमरान मसूद का पलटवार
दिल्ली: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में ECI के हलफनामे पर पलटवार करते हुए कहा है कि केवल यह दावा करना पर्याप्त नहीं है कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। इमरान मसूद ने कहा कि यदि तीनों आयुक्तों के फैसले भी नियमों के विरुद्ध या मनमाने हैं, तो वह गलत ही माने जाएंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस पूरे मामले से जुड़े सभी प्रशासनिक रिकॉर्ड तलब किए जाएं।
उनके अनुसार, असली मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि 'फॉर्म-6' (Form 6 - मतदाता सूची में नाम जोड़ने का फॉर्म) और मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने की प्रक्रिया का है। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा था कि 2025 और 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
असली मुद्दा ' फॉर्म 6 ' ही रहेगा
कांग्रेस MP इमरान मसूद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सभी ज़रूरी रिकॉर्ड तलब करने चाहिए। अगर तीनों सहमत भी हो गए, तो भी असली मुद्दा ' फॉर्म 6 ' ही रहेगा। अगर तीनों ने गलत फ़ैसला किया, तो भी यह गलत ही है, है ना? मुद्दा नियमों का पालन करने का है। हमें किसी एक व्यक्ति से कोई मतलब नहीं है।
सवाल ' फॉर्म 6 ' से जुड़ा है। सवाल वोट डिलीट करने से जुड़ा है। चुनाव अधिकारियों पर चुनावी पारदर्शिता के बुनियादी मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि यह मुद्दा कैसे हल हो सकता है? यहां चुनाव आयुक्त मुद्दा नहीं है। मुद्दा वोटों की चोरी है।
सर्वसम्मति से लिए गए फैसले
मसूद का यह बयान उस दौरान आया जब इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल किया, जिसमें कहा गया कि साल 2025 और 2026 में जारी किए गए सभी 3 स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न ऑर्डर पूरे कमीशन की मिली-जुली सहमति से पास किए गए "सर्वसम्मति से लिए गए फैसले" थे। CEC के एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज और फैसले लेने को चुनौती देने वाली पिटीशन के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में फाइल किए गए एक काउंटर-एफिडेविट में, पोल मॉनिटरिंग बॉडी ने कहा कि निर्देश एकतरफा नहीं थे।
ECI ने एफिडेविट में क्या कहा?
कमीशन ने खास तौर पर कहा कि तीन SIR ऑर्डर-जो जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए थे। संवैधानिक संस्था के सभी सदस्यों की एकमत से सहमति से लिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट को आगे बताया कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ECI ने एफिडेविट में कहा कि 3 SIR ऑर्डर के तहत फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है। कमीशन का यह बयान वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच आया है, जिसमें इस काम में कथित गड़बड़ियों को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में दिल्ली चलो रैली
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाले 'दिल्ली चलो' मार्च से पहले, 30 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक चीफ CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक सिंबॉलिक "पब्लिक इंपीचमेंट" प्रोसीडिंग्स करेगा। प्रोग्राम की डिटेल्स के मुताबिक, प्रोसीडिंग्स के दौरान, उन्हें हटाने के लिए एक पब्लिक फैसला सुनाया जाएगा। यह सारा हंगामा तब शुरू हुआ जब विपक्षी पार्टियों ने 23 सितंबर, 2026 को इंडियन एक्सप्रेस की एक मीडिया रिपोर्ट को उठाया, जिसमें कहा गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रोसेस पर लिए गए फैसलों पर तीन में से दो इलेक्शन कमिश्नरों ने आपत्ति जताई थी।
नए वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म में एकतरफ़ा बदलाव
कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उनकी जानकारी के बिना लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों पर आपत्ति जताई। जिन मुख्य मुद्दों पर ध्यान दिया गया है, उनमें ERONET इलेक्टोरल रोल डेटाबेस प्लेटफॉर्म का तेज़ी से सेंट्रलाइज़ेशन, Form 6 में नए वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म में किए गए एकतरफ़ा बदलाव और स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) एक्सरसाइज़ के दौरान वोटर लिस्ट हटाने के फ़ैसले शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने साफ़ किया कि कई सदस्यों वाली संस्था में अंदरूनी टेक्निकल नोट्स और लिखित सवाल पूछना स्टैंडर्ड प्रोसेस है। उसने भरोसा दिलाया कि SIR प्रोसेस के बारे में सभी आखिरी फ़ैसले एकमत से लिए गए थे और उन्हें पूरी कानूनी मंज़ूरी मिली हुई थी।
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