कॉकपिट में हमला, सामने मौत और फिर भी नहीं हारी हिम्मत... Smit Machchhar से Neerja Bhanot तक, ये हैं भारत के Aviation Heroes
Indian Aviation Heroes: भारत के Aviation इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जब पायलट या फ्लाइट क्रू को कुछ ही सेकेंड में बेहद मुश्किल फैसले लेने पड़े। इन मौकों पर उनकी सूझबूझ और हिम्मत ने यात्रियों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाई।
इस सूची में हाल ही में Captain Smit Machchhar का नाम भी जुड़ा है। 1 अक्टूबर 2026 को Flydubai की Dubai से Tel Aviv जा रही Boeing 737 फ्लाइट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कॉकपिट के अंदर ही को-पायलट ने Captain Machchhar पर हमला कर दिया।हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और खून बहने के बावजूद उन्होंने विमान पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने Emergency Lock Release को सक्रिय किया, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों को कॉकपिट तक पहुंचने का मौका मिला। हमलावर को काबू किया गया और विमान को सुरक्षित रूप से Saudi Arabia की ओर divert किया गया। इस घटना में विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बची।
Neerja Bhanot ने हाईजैक के दौरान दिखाई बहादुरी
भारत की Aviation history में Neerja Bhanot का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। साल 1986 में वह Pan Am Flight 73 में Senior Flight Purser थीं। Karachi में आतंकियों ने विमान को हाईजैक कर लिया था।Neerja ने खतरा भांपते हुए cockpit crew को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पायलट विमान से निकलने में सफल रहे। करीब 17 घंटे तक चले इस संकट के दौरान उन्होंने यात्रियों को बचाने के लिए कई अहम कदम उठाए।उन्होंने अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छिपा दिए, ताकि आतंकियों के लिए उन्हें अलग पहचानना मुश्किल हो। जब आतंकियों ने यात्रियों पर गोलीबारी शुरू की, तब Neerja ने तीन बच्चों को बचाने की कोशिश की। इसी दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई।उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
IC-814 हाईजैक में Captain Devi Sharan ने संभाला मोर्चा
साल 1999 में Indian Airlines की Flight IC-814 को पांच आतंकियों ने हाईजैक कर लिया था। विमान के पायलट Captain Devi Sharan थे।हाईजैक के बाद विमान को कई जगह ले जाया गया। ईंधन सीमित था और हालात लगातार बदल रहे थे। इसके बावजूद Captain Sharan ने धैर्य बनाए रखा और बातचीत के जरिए समय हासिल करने की कोशिश की।लगभग सात दिनों तक चले इस संकट के दौरान उनकी नेविगेशन क्षमता, सूझबूझ और लगातार बातचीत ने यात्रियों और क्रू की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विमान में मौजूद 176 यात्रियों और क्रू के सदस्यों के लिए यह बेहद कठिन समय था।
Wing Commander Rakesh Sharma ने युद्ध से लेकर अंतरिक्ष तक रचा इतिहास
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री Rakesh Sharma भी पहले एक लड़ाकू पायलट थे। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने MiG-21 से 21 combat missions में हिस्सा लिया था।युद्ध के दौरान खतरनाक परिस्थितियों में उड़ान भरने के बाद उन्होंने आगे चलकर अंतरिक्ष की यात्रा की। 1984 में वह Soviet space mission के तहत Salyut 7 space station पहुंचे और अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने।
Air Marshal Arjan Singh ने 1965 के युद्ध में संभाली IAF की कमान
Air Marshal Arjan Singh का नाम भी भारतीय सैन्य विमानन के इतिहास में प्रमुखता से दर्ज है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान वह Indian Air Force के Chief of Air Staff थे।युद्ध के दौरान सीमित संसाधनों के बीच IAF के अभियानों का नेतृत्व करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाद में उन्हें Indian Air Force के पहले और एकमात्र पांच सितारा रैंक वाले अधिकारी के रूप में Marshal of the Air Force बनाया गया।
Biju Patnaik की उड़ानों की कहानी भी बेहद खास
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े Biju Patnaik राजनीति में आने से पहले एक कुशल और साहसी पायलट थे।द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने Royal Indian Air Force के लिए जोखिम भरे मिशनों में हिस्सा लिया। 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने Srinagar में भारतीय सैनिकों की पहली खेप पहुंचाने वाली उड़ान भी संचालित की थी।उनकी बहादुरी की एक और चर्चित कहानी Indonesia से जुड़ी है, जहां उन्होंने बेहद जोखिम भरे हालात में उड़ान भरकर इंडोनेशियाई स्वतंत्रता सेनानियों को बचाने में मदद की थी।
Aviation में बहादुरी सिर्फ उड़ान भरने तक सीमित नहीं
Smit Machchhar, Neerja Bhanot, Captain Devi Sharan, Rakesh Sharma, Arjan Singh और Biju Patnaik की कहानियां अलग-अलग दौर और परिस्थितियों की हैं। किसी के सामने कॉकपिट में हमला था, किसी ने हाईजैक के दौरान यात्रियों को संभाला तो किसी ने युद्ध के बीच विमान उड़ाया।