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CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने CEC ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना, कहा- चुनाव एक फिक्स्ड मैच...

Toshi Shah · 29 सितम्बर 2026
Chief Election Commissioner

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखा रुख अपनाया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनाव आयोग का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना जरूरी है।

रांका ने लगाया आरोप

रांका ने आरोप लगाया कि बीते दो वर्षों में देश में हुए चुनावों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पहले से तय परिणाम वाला मुकाबला बताया, साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

SIR प्रक्रिया को लेकर भी लगाए आरोप

आशुतोष रांका ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

रांका ने दावा किया कि करीब 13 करोड़ लोगों के वोटिंग अधिकार छीन लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रयास इन लोगों के मतदान अधिकार बहाल कराने का रहेगा। इसी सिलसिले में उन्होंने 2 अक्टूबर से मुंबई में अभियान शुरू करने की घोषणा की।

2 अक्टूबर को मुंबई में जेल भरो आंदोलन

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में पार्टी की ओर से जेल भरो आंदोलन आयोजित किया जाएगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, चुनाव प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने पर केंद्रित रहेगा।

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कई शहरों में प्रदर्शन का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन भी हुए हैं। दिल्ली, पटना, प्रयागराज, जयपुर, हैदराबाद और श्रीनगर सहित कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन किए जाने की बात सामने आई है।

मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। एक याचिका के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग की गई है। हालांकि, चुनाव में कथित धांधली और SIR के तहत 13 करोड़ लोगों के मतदान अधिकार प्रभावित होने जैसे आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।