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Explainer: N Chandrasekaran अगले 5 साल तक संभालेंगे कमान! बोर्ड का बड़ा फैसला

Geeta Sharma · 17 सितम्बर 2026
चंद्रशेखरन 5 साल और टाटा संस के चेयरमैन रहेंगे

भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित व्यावसायिक घरानों में से एक, Tata Group के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। Tata Sons Limited के बोर्ड ने गुरुवार को N. Chandrasekaran को बतौर Executive Chairman 5 साल का नया कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब चंद्रशेखरन वर्ष 2032 तक टाटा ग्रुप की कमान संभालेंगे।

यह फैसला भारतीय कॉर्पोरेट जगत और टाटा ग्रुप दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि टाटा समूह के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी एग्जीक्यूटिव का कार्यकाल उसकी निर्धारित रिटायरमेंट उम्र के पार बढ़ाया गया है।

रिटायरमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव

टाटा ग्रुप की स्थापित कॉर्पोरेट पॉलिसी के अनुसार, समूह में एग्जीक्यूटिव भूमिका (Executive Role) निभा रहे अधिकारियों की सेवानिवृत्ति (Retirement) की उम्र 65 वर्ष तय की गई है। इसके अलावा, Non-Executive भूमिका में व्यक्ति 70 साल की उम्र तक बना रह सकता है। वहीं आपको बता दें, इससे पहले, 12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस दौरान उनके तीसरे कार्यकाल और बोर्ड पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। हालांकि, बोर्ड द्वारा दिए गए इस नए 5 साल के अप्रूवल ने उन्हें 2032 तक पद पर बनाए रखने का अधिकार दे दिया है। 

नोएल टाटा की चुनौती और बोर्ड का रुख

चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का फैसला सर्वसम्मति से मुक्त नहीं रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और कॉर्पोरेट सूत्रों के मुताबिक, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा चंद्रशेखरन के इस 5 साल के सेवा विस्तार को चुनौती दे सकते हैं। टाटा सन्स के बोर्ड में इस फैसले को लेकर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जहां बोर्ड के बहुमत सदस्यों ने चंद्रशेखरन के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उनके कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया, वहीं ट्रस्ट्स के नेतृत्व की ओर से प्रक्रियात्मक आधार पर असहमति दर्ज कराई गई। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि टाटा सन्स बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के बीच इस मुद्दे पर किस तरह का वैधानिक समझौता या रुख अपनाया जाता है।

इंटर्न से चेयरमैन तक का सफर

एन चंद्रशेखरन की टाटा ग्रुप के साथ यात्रा किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में एक सॉफ्टवेयर इंटर्न के रूप में की थी। अपनी काबिलियत के बल पर वह TCS के सबसे युवा CEO बने और कंपनी को वैश्विक आईटी मार्केट में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। साथ ही अक्टूबर 2016 में वे पहली बार टाटा सन्स के बोर्ड में शामिल हुए। इसके बाद साइरस मिस्त्री के हटने के बाद जनवरी 2017 में उन्हें आधिकारिक तौर पर टाटा सन्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

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चंद्रशेखरन का 9 साल का कार्यकाल

2017 में कमान संभालने के बाद से चंद्रशेखरन ने टाटा समूह को न केवल पारंपरिक व्यवसायों से निकालकर आधुनिक और भविष्योन्मुखी उद्योगों की ओर मोड़ा, बल्कि समूह की वित्तीय स्थिति को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान की। 

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन (एयर इंडिया का पुनर्गठन), सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और 'टाटा न्यू' के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे नए दौर के क्षेत्रों में आक्रामक रूप से कदम बढ़ाए।

वित्त वर्ष 2020 में समूह का कुल राजस्व ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 तक दोगुने से अधिक बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। ग्रुप का मुनाफा ₹32,000 करोड़ से 5 गुना से अधिक बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया। टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2020 के ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में ₹24.39 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को छू गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में अंतर

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टाटा साम्राज्य के शासन ढांचे को समझने के लिए इन तीनों संस्थाओं के बीच के अंतर को समझना बेहद आवश्यक है।  यह टाटा नाम के तहत संचालित होने वाली सभी स्वतंत्र कंपनियों और कारोबारों का एक विशाल समूह है। उदाहरण के लिए TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाइटन, और एयर इंडिया। 

यह टाटा ग्रुप की मुख्य प्रमोटर और होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस समूह की विभिन्न कंपनियों में बहुसंख्यक शेयरधारिता रखती है और सभी महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं वित्तीय फैसले यहीं से लिए जाते हैं।

यह विभिन्न परोपकारी और सामाजिक कल्याणकारी ट्रस्टों का एक समूह है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। यही कारण है कि टाटा संस के बोर्ड और निर्णयों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद निर्णायक होती है।

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 एन. चंद्रशेखरन के स्कूली शिक्षा के बारे में

एन. चंद्रशेखरन की जीवन-यात्रा इस बात का एक प्रेरक प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और शिक्षा के बल पर कोई भी व्यक्ति असाधारण ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। तमिलनाडु के नमक्कल जिले के मोहनुर गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखरन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। रोज़ाना 3 किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर स्कूल जाने वाले इस बालक का कॉर्पोरेट जगत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था, लेकिन इसी साधारण जीवन ने उनके भीतर अनुशासन और लगन की नींव रखी।

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कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एप्लाइड साइंसेज में स्नातक और एनआईटी त्रिची से कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातकोत्तर (MCA) करने के बाद, उन्होंने 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।

अपनी कड़ी मेहनत और दूरदर्शी नेतृत्व के दम पर वे TCS के CEO बने और कंपनी को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। 2017 में वे टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए और इस पद पर पहुंचने वाले टाटा परिवार के बाहर के दूसरे व्यक्ति बने। हाल ही में पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त चंद्रशेखरन की यह सफलता दर्शाती है कि आपकी शुरुआत जहां से भी हुई हो, क्षमता और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है।

किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखरन की कहानी

तमिलनाडु के नमक्कल जिले के मोहनुर गांव के एक किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखरन की यह यात्रा कड़ी मेहनत, अनुशासन और सादगी की मिसाल है।बचपन में सरकारी स्कूल जाने के लिए रोजाना 3 किलोमीटर पैदल चलने वाले तीन भाइयों में चंद्रा सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई गणपति सुब्रमण्यम (NGS) टीसीएस के CEO रहे, जबकि सबसे बड़े भाई एन. श्रीनिवासन ने मुरुगप्पा ग्रुप में फाइनेंस डायरेक्टर के रूप में पहचान बनाई। शुरुआती दिनों में तीनों भाइयों ने चेन्नई में एक कमरे के फ्लैट में रहकर और एक ही स्कूटर साझा करते हुए संघर्ष का दौर बिताया।

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1987 में एक ट्रेनी के रूप में टीसीएस से जुड़ने वाले चंद्रा अपनी असाधारण प्रतिबद्धता और लगन के बल पर देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने के शीर्ष पद तक पहुंचे। अपनी पत्नी ललिता और बेटे प्रणव के साथ सादगीपसंद जीवन जीने वाले चंद्रशेखरन की यह सफलता भारतीय उद्योग जगत के लिए प्रेरणादायक है।