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बच्चों के खिलाफ अपराध पर केंद्र सरकार सख्त, रोकथाम का खाका तैयार; बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

MADHVI TANWAR · 19 अक्टूबर 2026
Crimes Against Children

Crimes Against Children: बच्चे देश का भविष्य होते हैं। लेकिन कई बार वह अपराध का शिकार हो जाते है। बीते वर्षों के आंकड़े पर गौर किया जाए तो बच्चों संग हो रहे अपराधों में लगातार वृद्धि देखी गई है। गृह मंत्रालय ने मुद्दों पर संसदीय समिति 2 नवंबर को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल सरकारों के बच्चों के खिलाफ अपराध पर विचार सुनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और केरल सरकारों के "बच्चों के खिलाफ अपराध" पर विचार सुनना है। यह बैठक पहले 27 अक्टूबर को निर्धारित थी।

2 नवंबर को बैठक की तैयारी

बैठक संसद भवन परिसर में सुबह 11 बजे आयोजित की जाएगी, जहां समिति अपने 2026-27 कार्यकाल के दौरान परीक्षा के लिए विषयों पर विचार करेगी और उनका चयन करेगी। सुबह 11:30 बजे बच्चों के खिलाफ अपराधों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। राजस्थान सरकार दोपहर 12:30 बजे, तमिलनाडु दोपहर 2:30 बजे और केरल दोपहर 3:30 बजे अपने विचार प्रस्तुत करेगी।

यह बैठक पहले गुरुवार 22 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अब मंगलवार 27 अक्टूबर को स्थानांतरित कर दी गई है। सूचना में कहा गया है कि बैठक से संबंधित एजेंडा पत्र उचित समय पर वितरित कर दिए जाएंगे और समिति के सदस्यों से बैठक में उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।

बच्चों के खिलाफ अपराधों पर विचार-विमर्श समिति द्वारा गृह मामलों से संबंधित मुद्दों की जांच का हिस्सा है, और राज्य सरकारों से निर्धारित सत्रों के दौरान इस विषय पर अपने विचार साझा करने की अपेक्षा की जाती है।

यौन शौषण को रोकना पहली प्राथमिक

बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण, अपहरण, हिंसा और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना है।

चारों राज्यों का संसदीय पैनल देगा विचार

संशोधित कार्यक्रम में चारों राज्यों को संसदीय पैनल के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। समिति राज्य सरकारों के साथ निर्धारित चर्चाओं के साथ-साथ 2026-27 सत्र के दौरान परीक्षा के लिए विषयों के चयन पर भी विचार करेगी। 23 सितंबर को संसदीय समिति ने संसद भवन परिसर में एक बैठक आयोजित की और पूर्वोत्तर राज्यों में बच्चों के खिलाफ अपराध और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन पर चर्चा की।

लोकसभा के 21,राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल

यह बैठक 2 अलग-अलग सत्रों में आयोजित की गई थी। 31 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता भाजपा के राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल कर रहे हैं। इसमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं।राज्यसभा सदस्यों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद हारिस बीरन शामिल हैं।

यह लोग शामिल

भाजपा सांसद समिक भट्टाचार्य, नीरज शेखर और तरुण चुघ; कांग्रेस सांसद अजय माकन; तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन; शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत; आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह; और राजद सांसद संजय यादव होंगे शामिल। समिति के लोकसभा सदस्यों में पश्चिम बंगाल के बारासात निर्वाचन क्षेत्र की सांसद काकोली घोष, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अनिल यशवंत देसाई शामिल हैं।

भाजपा सांसद आशीष दुबे, सतीश कुमार गौतम, नवीन जिंदल, सौमित्र खान, ज्योतिर्मय सिंह महतो, बीवाई राघवेंद्र, विष्णु दयाल राम और डेलकर कलाबेन मोहनभाई शामिल हैं।
कांग्रेस सांसद जय प्रकाश, मुहम्मद हमदुल्ला सईद, प्रियंका गांधी वाद्रा और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग; टीडीपी सांसद केसिनेनी शिवनाथ और कृष्णा प्रसाद टेनेटी; राकांपा (सपा) सांसद सुप्रिया सुले; डीएमके सांसद थिरु दयानिधि मारन समेत अन्य शामिल है।

कई विषयों पर होगा विचार-विमर्श

इस मुद्दे पर होने वाली बैठक में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों, जांच प्रक्रिया को मजबूत करने, अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय दिलाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है। इसके अलावा, पुलिस और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, जागरूकता अभियान तथा संवेदनशील मामलों में बच्चों की पहचान और गरिमा की रक्षा जैसे पहलुओं पर भी जोर दिया जा सकता है।

8 समितियां करेंगी विचार विमर्श

दोनों सदनों की 24 विभागीय संसदीय स्थायी समितियों में से, गृह मामलों की समिति सहित आठ समितियां राज्यसभा अध्यक्ष के निर्देशन और नियंत्रण में कार्य करती हैं, जबकि शेष 16 समितियां लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशन और नियंत्रण में कार्य करती हैं।

बच्चों को मिले सुरक्षित माहौल

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना और अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाना है। हालांकि, बैठक के एजेंडे और प्रस्तावित फैसलों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार की रणनीति में किन उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।

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