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6 महीने से पहले नवजात शिशु को क्यों नहीं देना चाहिए पानी? जानिए बड़ी वजह

MADHVI TANWAR · 29 अगस्त 2026
NewbornBaby

Health News : नन्हे मेहमान की किलकारी हर घर में गूंजती है। जैसे ही नन्हा मेहमान घर में आता है वैसे ही खुशियों का आगमन भी होता है। लेकिन बच्चे की देख-रेख को लेकर भी तमाम चिंताए कदम रखती है। शिशु की साफ-सफाई, उसे समय पर दूध का सेवन कराना यह तमाम सवाल भी शिशु के साथ जन्म लेते हैं। घर में नन्ही गूंज का सबसे ज्यादा इंतजार माता-पिता को होता हैा। अपार खुशियां और ढेरों नई जिम्मेदारियां। नवजात शिशु बेहद ही नाजुक होते हैं, ऐसे में उनकी चिंता स्वाभाविक है।

6 माह तक शिशु के लिए केवल मां का दूध ही सबसे बेहतर

डॉक्टर की सलाह के मुताबिक जन्म लेने के कुछ समय बाद से तकरीबन 6 माह तक शिशु के लिए केवल मां का दूध ही सबसे बेहतर आहार होता है। जिसमें सभी पोषक तत्व और एंटीबॉडीज मौजूद रहते हैं। बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और उसे बीमारियों से बचाते हैं। लेकिन हर माता-पिता के मन में पहला सवाल यही उठता है कि बच्चे को पानी कब देना सही होगा।

फॉर्मूला मिल्क कितना सही

बच्चे जन्म से नाजुक होते हैं, वह केवल मां के दूध पर ही निर्भर रहते हैं। मां का दूध ही शिशु के शरीर को ताकतवर बनाने में अहम रहता है। डॉक्टर जन्म से लेकर 6 माह तक शिशु को पानी की एक बूंद भी नहीं देने की बात कहते हैं। 6 माह तक मां का दूध ही डॉक्टर के लिए भोजन का भी काम करता है। ऐसे में अन्य तरल पदार्थ देना बिलकुल भी सही नहीं। लेकिन कभी-कभी देखा गया है कि किसी कारणवश बच्चे को फॉर्मूला मिल्क देना पड़ रहा है तो उसे बनाने के लिए भी तरल पदार्थ बनाने की मात्रा एक दम माप के हिसाब से ही होनी चाहिए। पानी मिलाने की उसमें कोई जरूरत नहीं। इसलिए फॉर्मूला मिल्क में तरल पदार्थ साथ में दिया जाता है। इसलिए अलग से पानी मिलाने की जरूरत नहीं।

मां के दूध में ही है पर्याप्त पानी

डॉक्टरों की माने तो 6 माह तक बच्चे को अलग से पानी देने की जरूरत नहीं है। मां के दूध में तकरीबन 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा पानी का ही होता है। यह बच्चे को स्वच्छ तरीके से भी प्यास बुझाने के काम आता है। जिससे बच्चा पूरी तरह हाइड्रेटेड रहता हैा।

बच्चे में नहीं होता इंफेक्शन का खतरा

नवजात बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर रहती है। इसलिए बाहरी पानी देना उनकी सेहत से खिलवाड़ कर सकता है। क्योंकि बाहर के पानी में मौजूद सूक्ष्म बैक्टीरिया, बच्चे में डायरिया, पीलिया या पेट के गंभीर इंफेक्शन का मुख्य कारण बन सकता है।

वाटर इंटॉक्सिकेशन

दरअसल 6 माह से छोटे बच्चे के शरीर की किडनी पूर्ण रूप से विकसित नहीं होती है। ज्यादा पानी बच्चे के कारण नवजात के शरीर में सोडियम की मात्रा तेजी से गिर सकती है। इसके वजह से बच्चे को दौरे जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। जो बेहद खतरनाक स्थिति है।

6 माह बाद दे बच्चे को इस तरह से पानी

बच्चा जब 6 महीने का होता है, तो माता-पिता अन्नप्राशन करते हैं, जिसमें बच्चे को उसका पहला आहार खिलाया जाता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चे की प्यास का भी पूरा ध्यान रहता है, जिसमें बच्चे के 6 महीने का होते ही वह डॉक्टरों से सलाह लेते हैं कि क्या वह अब बच्चे को पानी दे सकते हैं या नहीं। ऐसे में डॉक्टरों की पहली सलाह यही होती है कि बच्चे को पानी उबालकर और ठंडा करके ही दें। बच्चे को कप या चम्मच की सहायता से ही पानी दें। शुरुआत में सीमित मात्रा में ही बच्चे को पानी दें जिससे वह कुछ ही घूंट पानी पी सकते।

 

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