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डिप्टी सीएम आवास के बाहर ITI इंस्ट्रक्टर अभ्यर्थी, आशा वर्कर्स और कोविड स्टाफ का हल्लाबोल

Geeta Sharma · 16 सितम्बर 2026
आशा वर्कर्स और कोविड स्टाफ ने किया विरोध प्रदर्शन

ASHA Workers Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बुधवार को युवाओं, स्वास्थ्य कर्मियों और मानदेय कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन का गवाह बनी। अपनी विभिन्न लंबे समय से पेंडिंग मांगों को लेकर ITI इंस्ट्रक्टर भर्ती के अभ्यर्थी, आशा वर्कर्स और कोविड-19 महामारी के दौरान सेवाएं देने वाले हेल्थकेयर स्टाफ भारी संख्या में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे।

विभिन्न जिलों से आए प्रदर्शनकारियों ने अपनी समस्याओं को शासन के समक्ष रखते हुए जल्द से जल्द समाधान की गुहार लगाई। अभ्यर्थियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारियों द्वारा ढिलाई बरती जा रही है।

ITI इंस्ट्रक्टर अभ्यर्थियों की गुहार, 2022 से अटकी भर्ती प्रक्रिया जल्द हो शुरू

डिप्टी सीएम आवास पर पहुंचे ITI इंस्ट्रक्टर अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में हो रही भारी देरी को लेकर अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन में शामिल बलिया के अभ्यर्थी सूर्यकांत चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2022 से ITI इंस्ट्रक्टर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती पेंडिंग होने के कारण हज़ारों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अंधकार में लटका हुआ है और उम्र भी निकल रही है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए ताकि युवाओं को रोज़गार का अवसर मिल सके।

आशा वर्कर्स और संगिनियों की मांग

स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ मानी जाने वाली आशा वर्कर और आशा संगिनी भी अपनी 5-सूत्रीय मांगों को लेकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निवास पर पहुंचीं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही आशा संगिनी संघ की प्रदेश अध्यक्ष मीरा सिंह ने कहा कि लंबे समय से आशा कार्यकर्ताओं की जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है।

आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें

1. बढ़ती महंगाई के अनुसार न्यूनतम मानदेय तय किया जाए और उचित वित्तीय सुरक्षा दी जाए।

2. वर्तमान में दिए गए पुराने 2G मोबाइल फोन को बदलकर 5G स्मार्ट डिवाइस प्रदान किए जाएं।

3. मौजूदा 250 रुपये के रिचार्ज भत्ते को बढ़ाकर 5G डेटा पैक से बदला जाए ताकि डिजिटल स्वास्थ्य पोर्टल का कार्य सुचारू रूप से हो सके।

4. प्रदर्शन में शामिल रेणु राज जैसी आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में डिजिटल वर्कलोड तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं और वित्तीय सहायता पुरानी ही है।

सरकारी सेवाओं में समायोजन और नियमितीकरण

महामारी के संकट काल में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले आउटसोर्स कोविड हेल्थकेयर वर्कर भी समायोजन की मांग को लेकर एकजुट हुए। बाराबंकी से आए एक वर्कर ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में अपनी सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को महामारी खत्म होने के बाद नजरअंदाज कर दिया गया है।

आगे स्वास्थ्य कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद जिला चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर पर आदेशों को लागू नहीं किया जा रहा है। इन कर्मचारियों की मांग है कि कोविड अवधि के अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्वास्थ्य विभाग की नियमित या संविदा सेवाओं में समायोजित किया जाए।

'सरकार युवाओं के साथ खड़ी है'

इससे एक दिन पूर्व, 15 सितंबर को भी UPSSSC की विभिन्न भर्तियों के 200 से अधिक अभ्यर्थी अपनी पेंडिंग मांगों को लेकर डिप्टी सीएम के आवास पर पहुंचे थे। इनमें UPSSSC फॉरेस्ट गार्ड भर्ती-2023 के मेडिकल परिणाम, लैब टेक्नीशियन और अन्य लंबित परीक्षाओं के उम्मीदवार शामिल थे। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अभ्यर्थियों और प्रतिनिधिमंडलों को आश्वस्त दिया है। उन्होंने कहा कि UPSSSC के उच्च अधिकारियों से वार्ता कर लंबित नियुक्ति पत्रों और रिजल्ट प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

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राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही अभ्यर्थियों की मांगों पर बिंदुवार विचार करने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकों का शेड्यूल तय किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि शासन स्तर से मिले इन आश्वासनों पर जल्द से जल्द ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।