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दो सैन्य अफसरों की पत्नियों से कथित संबंध का आरोप, मेजर को नौकरी से हटाना चाहती है सेना

Pradeep Singh · 17 अक्टूबर 2026
आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल

नई दिल्ली: भारतीय सेना एक मेजर को सेवा से बर्खास्त करने की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। मेजर पर दो साथी सैन्य अधिकारियों की पत्नियों के साथ कथित विवाहेतर संबंध रखने का आरोप है। इस मामले में सेना ने कोर्ट मार्शल के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता चुना है। हालांकि, मेजर ने इन कार्यवाहियों को चुनौती दी है और आरोपों को लेकर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने 10 अगस्त को आर्मी रूल्स 19 और 14 के तहत मेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा गया कि कोर्ट मार्शल किए बिना उन्हें सेवा से क्यों न बर्खास्त कर दिया जाए। सेना ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट मार्शल कराना उचित नहीं होगा।

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल से भी नहीं मिली रोक

मेजर ने सेना की कार्रवाई रोकने के लिए नई दिल्ली स्थित आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ का रुख किया था। 14 अक्टूबर को जस्टिस राजेंद्र मेनन और लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती की पीठ ने कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने सेना को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के निष्कर्ष और आरोपों की सुनवाई से संबंधित कार्यवाही की प्रतियां मेजर को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पीठ ने मेजर से कहा कि वह कारण बताओ नोटिस के जवाब में अपनी आपत्तियां और पक्ष रखें।

तत्कालीन पत्नी की शिकायत से शुरू हुआ मामला

मामले की शुरुआत अगस्त 2023 में हुई थी, जब मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सेना मुख्यालय के एडिशनल डायरेक्टरेट जनरल ऑफ डिसिप्लिन एंड विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कथित विवाहेतर संबंधों, नशीले पदार्थों के सेवन और पत्नी की उपेक्षा जैसे आरोप लगाए गए थे।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मेजर के चार महिलाओं के साथ संबंध थे, जिनमें दो महिला सैन्य अधिकारियों की पत्नियां थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

अक्टूबर 2023 में मुख्यालय 55 (I) मैकेनाइज्ड ब्रिगेड ने अधिकारी के कथित अनुचित आचरण की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की। इसके बाद भी मामले में आगे की जांच और प्रक्रियाएं जारी रहीं।

जांच प्रक्रिया पर मेजर ने उठाए सवाल

मेजर ने ट्रिब्यूनल में दलील दी कि जांच के दौरान आर्मी रूल 180 के तहत उन्हें मिलने वाले प्रक्रियागत संरक्षण का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि जिन महिलाओं के नाम शिकायत में आए थे और उनके पतियों को जांच में बुलाकर पूछताछ नहीं की गई, जबकि उन्होंने ऐसा करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जिनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप और पेन ड्राइव शामिल थे, को जब्त करने तथा उनके आवास की तलाशी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

मार्च 2025 में सेना ने आर्मी एक्ट की धारा 45 और 63 के तहत एक अस्थायी आरोपपत्र तैयार किया। इसके बाद साक्ष्यों का सार और अतिरिक्त साक्ष्यों का सार तैयार किया गया। मेजर ने इस दौरान भी संबंधित महिलाओं की जांच किए जाने की मांग दोहराई।

तलाक के बाद पूर्व पत्नी ने वापस ली शिकायत

मेजर ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उनकी शादी 30 मार्च 2026 को आपसी सहमति से तलाक के जरिए समाप्त हो गई थी। यह तलाक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश के तहत हुआ था।

मेजर की याचिका के अनुसार, समझौते के तहत उनकी पूर्व पत्नी ने अगस्त 2023 में दर्ज शिकायत वापस ले ली थी। समझौते में कथित तौर पर पूर्व पत्नी ने कहा कि वैवाहिक विवाद के दौरान शिकायत दर्ज की गई थी और वह संबंधित अधिकारियों के समक्ष बयान देने पर भी सहमत हुई थीं।

मेजर ने दलील दी कि शिकायत वापस लिए जाने से उनके खिलाफ प्रस्तावित प्रशासनिक कार्रवाई का आधार कमजोर पड़ता है। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर कार्रवाई रोकने से इनकार कर दिया।

अभी अंतिम फैसला नहीं, प्रशासनिक कार्रवाई जारी

ट्रिब्यूनल ने मेजर को कारण बताओ नोटिस का जवाब देने और अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही, सेना को संबंधित जांच दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेजर को सेवा से हटाने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर जारी है। आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और उन्हें दोषी ठहराने वाला कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

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