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अमिताभ बच्चन ने जीता पर्सनैलिटी राइट्स केस, दिल्ली हाईकोर्ट का अंतिम फैसला; बिना अनुमति नाम और आवाज के इस्तेमाल पर रोक

Pradeep Singh · 7 नवम्बर 2026
अमिताभ बच्चन

नई दिल्ली/मुंबई: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को उनके पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) मामले में बड़ी कानूनी जीत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता के पक्ष में अंतिम फैसला सुनाते हुए कई संस्थाओं और अज्ञात लोगों को उनकी अनुमति के बिना नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोक दिया है।

जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव की अदालत ने अमिताभ बच्चन की ओर से दायर मुकदमे का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया। यह मामला नवंबर 2022 से अदालत में चल रहा था। उस समय हाईकोर्ट ने अभिनेता को अंतरिम राहत देते हुए उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किया था।

क्या है पूरा मामला?

अमिताभ बच्चन ने अदालत का दरवाजा तब खटखटाया था, जब उनके नाम और पहचान का कथित तौर पर बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था। इसमें कई तरह के प्लेटफॉर्म और उत्पाद शामिल थे।

मामले में सामने आए उदाहरणों में ‘Amitabh Bachchan Video Call’ नाम का मोबाइल ऐप, ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की कथित लॉटरी के प्रचार वाले मैसेज, अभिनेता की तस्वीर वाली सामान्य ज्ञान की क्विज बुक, टी-शर्ट, पोस्टर और उनके नाम से जुड़े इंटरनेट डोमेन शामिल थे।

अदालत ने माना कि अमिताभ बच्चन के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया और इससे लोगों के बीच उनके समर्थन या प्रचार से जुड़ा गलत संदेश जा सकता था।

क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?

पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति को अपनी पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नियंत्रण रखने का अधिकार देते हैं। इसमें नाम, चेहरा, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व से जुड़ी दूसरी पहचान शामिल होती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल को नियंत्रित करने का अधिकार ‘राइट टू पब्लिसिटी’ यानी प्रचार संबंधी अधिकार के अंतर्गत आता है।

इस मामले में अदालत ने माना कि अमिताभ बच्चन की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित है और उनकी लोकप्रियता का इस्तेमाल बिना अनुमति व्यावसायिक फायदे के लिए नहीं किया जा सकता।

अज्ञात लोगों पर भी लागू होगा अदालत का आदेश

इस फैसले की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने अज्ञात व्यक्तियों यानी ‘जॉन डोज’ के खिलाफ भी आदेश जारी किया है।

अदालत ने माना कि इंटरनेट वेबसाइटों, मोबाइल ऐप, पोस्टर और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कई बार ऐसे लोग किसी सेलिब्रिटी की पहचान का गलत इस्तेमाल करते हैं, जिनकी पहचान करना आसान नहीं होता।

ऐसे मामलों में हर व्यक्ति का पता लगाना संभव नहीं होता। इसलिए अदालत ने अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व अधिकारों को अज्ञात लोगों द्वारा किए जाने वाले अनधिकृत इस्तेमाल से भी सुरक्षा दी है।

साथ ही अभिनेता को भविष्य में उनकी पहचान के किसी नए अनधिकृत इस्तेमाल की स्थिति में नए सिरे से कानूनी कार्रवाई करने की छूट भी दी गई है।

चार प्रतिवादियों ने किया समझौता

इस मामले में चार प्रतिवादियों राजत नागी, मनोज पब्लिकेशंस, तमाटिना और महेश पटेल ने अमिताभ बच्चन के साथ समझौता किया। इन लोगों ने अभिनेता के पब्लिसिटी और प्राइवेसी राइट्स को स्वीकार किया।

समझौते के तहत एक प्रतिवादी ने ‘Amitabh Bachchan Video Call’ ऐप हटाने पर सहमति जताई। वहीं दूसरे ने अभिनेता की तस्वीर वाली सामान्य ज्ञान की क्विज बुक का प्रकाशन बंद कर दिया।

एक अन्य प्रतिवादी ने अमिताभ बच्चन के नाम और तस्वीर वाले पोस्टर बेचना बंद किया, जबकि अमिताभबच्चन डॉट इन (amitabhbachchan.in) डोमेन के रजिस्ट्रेंट ने बताया कि डोमेन हटा दिया गया है।

सभी समझौता करने वाले प्रतिवादियों ने भविष्य में अभिनेता की स्पष्ट अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज या व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का इस्तेमाल नहीं करने का भरोसा दिया। अदालत ने इस समझौते को कानूनी और स्वैच्छिक मानते हुए उसी के अनुसार अंतिम डिक्री पारित की।

बाकी प्रतिवादियों के खिलाफ भी आया फैसला

मामले के बाकी प्रतिवादियों को अदालत की ओर से नोटिस दिए गए थे, लेकिन वे न तो सुनवाई में पेश हुए और न ही अपना लिखित जवाब दाखिल किया। उनका लिखित जवाब दाखिल करने का अधिकार पहले ही बंद किया जा चुका था।

अदालत ने कहा कि केवल किसी प्रतिवादी के जवाब दाखिल नहीं करने के आधार पर स्वतः फैसला नहीं सुनाया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में ऐसे कोई विवादित तथ्य नहीं थे, जिनके लिए अलग से ट्रायल की जरूरत पड़ती।

कोर्ट के मुताबिक, अमिताभ बच्चन को एकतरफा साक्ष्य पेश करने के लिए बाध्य करना उनकी याचिका में पहले से दर्ज आरोपों को दोहराने जैसा होता। इसलिए मामले में समरी जजमेंट देना उचित था।

अदालत ने बाकी प्रतिवादियों के खिलाफ भी मुकदमे का फैसला अमिताभ बच्चन के पक्ष में सुनाया। इसके साथ ही नवंबर 2022 में जारी अंतरिम रोक का आदेश अंतिम डिक्री में समाहित हो गया।

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