गोरखपुर में सपा की बड़ी कार्रवाई, अखिलेश यादव ने जिला और महानगर कमेटी भंग की; जानिए क्या है पूरा मामला?
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर की पूरी जिला और महानगर कार्यकारिणी तत्काल प्रभाव से भंग कर दी है। इसके साथ ही जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां खत्म कर दी गई हैं।
पार्टी कार्यालय में झड़प के बाद लिया गया फैसला
यह कार्रवाई उस घटना के बाद हुई है, जिसमें हाल ही में सपा के गोरखपुर स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर झड़प हो गई थी। इस घटना से पार्टी को पूर्वांचल में राजनीतिक तौर पर काफी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था।
सपा नेतृत्व ने केवल जिला और महानगर इकाई ही नहीं, बल्कि गोरखपुर में पार्टी के सभी फ्रंटल संगठनों और सहयोगी इकाइयों के पदाधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व संगठन में अनुशासन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रहा है।
सीट बंटवारे को लेकर नेताओं को अखिलेश की नसीहत
इससे पहले शनिवार को अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं को सीट बंटवारे और कांग्रेस के साथ गठबंधन से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह दी थी। लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सीट बंटवारे को लेकर नेताओं की जो भी राय या चिंता है, उसे पार्टी के भीतर ही रखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि मैं अपने सभी नेताओं से कहना चाहता हूं कि सीट बंटवारे को लेकर उनकी जो भी राय या चिंता है, वह हमारे साथ साझा करें।”
सपा सांसद ने कांग्रेस की 150 सीटों की मांग पर उठाए सवाल
सीट बंटवारे को लेकर सपा के भीतर यह बयानबाजी तब तेज हुई, जब पार्टी सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस की कथित 150 सीटों की मांग को अव्यावहारिक बताया था। पटेल ने पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के पास सिर्फ दो विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 125 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस को 150 सीटें देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास दो विधायक हैं, जबकि हमारे पास 125 हैं। इस अनुपात के हिसाब से उन्हें सात-आठ सीटें मिलनी चाहिए। हम उन्हें 50 सीटें भी दे सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा सीटें देना सीटों को बर्बाद करने और हार का जोखिम बढ़ाने जैसा होगा।”
2027 में BJP और SP के बीच मुख्य मुकाबला
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ बीजेपी और समाजवादी पार्टी को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर 41.29 प्रतिशत रहा था। वहीं अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी 111 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही थी। सपा का वोट शेयर 32.06 प्रतिशत था।
वहीं बहुजन समाज पार्टी को सिर्फ एक सीट और कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं। दोनों पार्टियों का वोट शेयर क्रमशः 12.88 प्रतिशत और 2.33 प्रतिशत रहा था। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में संगठनात्मक स्तर पर हुई यह कार्रवाई सपा के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
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