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असम: अखिल गोगोई ने 14 दिन बाद खत्म किया धरना, बाढ़ पीड़ितों को राहत देने का हिमंत बिस्वा सरमा ने दिया आश्वासन

Pradeep Singh · 15 अक्टूबर 2026
अखिल गोगोई

गुवाहाटी: असम में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास सहायता देने की मांग को लेकर धरने पर बैठे रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने गुरुवार को अपना 14 दिवसीय धरना समाप्त कर दिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से बाढ़ पीड़ितों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

अखिल गोगोई ने 2 अक्टूबर को असम विधानसभा परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांग थी कि शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के सभी पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता दी जाए।

बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए 15 हजार रुपये की मांग

अखिल गोगोई का आरोप था कि सरकार की ओर से निर्धारित समयसीमा के बावजूद कई पात्र परिवारों को अब तक सहायता राशि नहीं मिली है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ-साथ पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई।

गोगोई ने शिवसागर और चराइदेव के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता तथा चारों जिलों के प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की।

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद धरना वापस

धरना समाप्त करने के फैसले पर अखिल गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जब मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, तो सरकार को उसे पूरा करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें इसका श्रेय लेने की जरूरत नहीं है और सरकार को अपना काम करने का मौका मिलना चाहिए।

राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशब महंत ने भी राहत और पुनर्वास से जुड़ी मांगों पर गोगोई के साथ बातचीत की।

हजारों परिवारों को मिली सहायता, कई परिवार अब भी इंतजार में

धरने के दौरान अखिल गोगोई ने बताया था कि उनके विधानसभा क्षेत्र में लगभग 4,000 परिवारों को 15,000 रुपये की सहायता मिल चुकी है, जबकि अन्य 3,064 परिवारों के लिए भुगतान स्वीकृत किया गया है। उनके अनुसार, इन अतिरिक्त भुगतानों की राशि करीब 4.60 करोड़ रुपये होगी।

गोगोई ने लाभार्थियों के सर्वेक्षण पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सर्वेक्षण में यदि सभी प्रभावित परिवारों की पहचान नहीं की गई, तो वास्तविक नुकसान झेलने वाले कई परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह सकते हैं।

CBI जांच की मांग पर अब भी मतभेद

अखिल गोगोई ने बाढ़ की परिस्थितियों और कथित लापरवाही की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। हालांकि, राज्य सरकार ने इसके बजाय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है। गोगोई के मुताबिक, उन्होंने इस विकल्प को अनिच्छा के बावजूद स्वीकार किया है।

57 हजार परिवारों के सर्वेक्षण का दावा

राज्य सरकार के अनुसार, ऊपरी असम में बाढ़ प्रभावित लगभग 57,000 परिवारों के लिए सर्वेक्षण के तीन दौर पूरे किए जा चुके हैं। इन परिवारों को मुआवजा देने के लिए करीब 1,100 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान है।

सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजने और केंद्रीय सहायता मिलने में देरी होने की स्थिति में राहत राशि चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर विचार करने की बात कही है।

बाढ़ के कारण प्रभावित जिलों में मकानों, कृषि भूमि, सड़कों, तटबंधों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। अब प्रभावित परिवारों को राहत राशि और पुनर्वास सहायता मिलने का इंतजार है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राहत वितरण और मुआवजे की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

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