27 की सत्ता: 2012 में कांग्रेस, फिर लगातार दो बार BJP की जीत… पयागपुर में 2027 का चुनावी गणित क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। पार्टियां अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरण साधने में जुटी हैं। बहराइच जिले की पयागपुर विधानसभा सीट भी उन सीटों में शामिल है, जहां पिछले तीन विधानसभा चुनावों में राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदली है। 2012 में यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2017 और 2022 में BJP ने लगातार दो बार सीट पर कब्जा जमाया। अब 2027 से पहले इस सीट के पिछले चुनावी आंकड़ों को देखें तो मुकाबले की तस्वीर में कई बदलाव नजर आते हैं।
पयागपुर विधानसभा सीट संख्या 287 है और यह सामान्य सीट है। यह कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां करीब 59 फीसदी मतदान हुआ था।
2012 में कांग्रेस ने दर्ज की थी बड़ी जीत
2012 के विधानसभा चुनाव में पयागपुर में कांग्रेस के मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप ने जीत हासिल की थी। उन्हें 65,176 वोट मिले थे। उनका वोट शेयर करीब 34.8 फीसदी रहा। दूसरे नंबर पर BSP के अजीत प्रताप सिंह रहे, जिन्हें 38,130 वोट मिले।
कांग्रेस उम्मीदवार ने करीब 27 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। खास बात यह है कि उस चुनाव में BJP के सुभाष त्रिपाठी को 22,155 वोट मिले थे और वह शीर्ष दो उम्मीदवारों में शामिल नहीं थे। यानी 2012 में पयागपुर का चुनावी मुकाबला आज के मुकाबले काफी अलग था।
उस समय अलग-अलग पार्टियों के बीच वोटों का बंटवारा भी देखने को मिला। कांग्रेस के बाद BSP और सपा के उम्मीदवारों को भी अच्छी संख्या में वोट मिले थे। यही वजह रही कि 2012 के नतीजे में जीत का अंतर 27 हजार से ज्यादा रहा।
2017 में बदली पूरी तस्वीर
2017 के विधानसभा चुनाव में पयागपुर का चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया। BJP ने यहां बड़ी जीत दर्ज की और सुभाष त्रिपाठी विधायक बने। उन्हें 1,02,254 वोट मिले, जबकि सपा के मुकेश श्रीवास्तव 60,713 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
BJP ने यह चुनाव 41,541 वोटों के बड़े अंतर से जीता। 2012 में जहां सुभाष त्रिपाठी चौथे स्थान पर थे, वहीं पांच साल बाद उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल कर सीट अपने नाम कर ली।
यह बदलाव सिर्फ उम्मीदवार की जीत तक सीमित नहीं था। 2017 में BJP का वोट शेयर करीब 49.6 फीसदी रहा। वहीं सपा दूसरे स्थान पर रही। इस चुनाव के बाद पयागपुर की राजनीति में BJP की मजबूत मौजूदगी दिखाई देने लगी।
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2022 में BJP ने सीट बचाई, लेकिन घट गया जीत का अंतर
2022 में एक बार फिर BJP ने सुभाष त्रिपाठी को मैदान में उतारा। उन्होंने 1,10,162 वोट हासिल किए और लगातार दूसरी बार पयागपुर से जीत दर्ज की। सपा के मुकेश श्रीवास्तव को 98,106 वोट मिले।
BJP ने चुनाव तो जीत लिया, लेकिन 2017 की तुलना में जीत का अंतर काफी कम हो गया। 2017 में जहां अंतर 41,541 वोट था, वहीं 2022 में यह घटकर 12,056 वोट रह गया।
यहां एक और बदलाव देखने को मिला। 2017 में BJP को 1,02,254 वोट मिले थे, जो 2022 में बढ़कर 1,10,162 हो गए। यानी BJP के कुल वोट बढ़े। दूसरी तरफ सपा के वोट भी 60,713 से बढ़कर 98,106 हो गए। इसका मतलब यह है कि 2022 में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला ज्यादा केंद्रित रहा।
तीन चुनावों का पूरा गणित
चुनाव वर्ष विजेता पार्टी विजेता के वोट रनर-अप जीत का अंतर 2012 मुकेश श्रीवास्तव कांग्रेस 65,176 अजीत प्रताप सिंह (BSP) 27,046 2017 सुभाष त्रिपाठी BJP 1,02,254 मुकेश श्रीवास्तव (SP) 41,541 2022 सुभाष त्रिपाठी BJP 1,10,162 मुकेश श्रीवास्तव (SP) 12,056इन आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव 2017 और 2022 के बीच दिखाई देता है। BJP ने 2022 में सीट बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर करीब 29,500 वोट कम हो गया। वहीं सपा के वोट में करीब 37 हजार की बढ़ोतरी हुई।
2022 में मुकाबला दो प्रमुख दलों के बीच सिमटा
2022 के आंकड़ों को देखें तो BJP और सपा के उम्मीदवारों को मिलाकर करीब 90 फीसदी से ज्यादा वोट मिले। BJP को 47.77 फीसदी और सपा को 42.54 फीसदी वोट मिले। BSP को 4.87 फीसदी, AIMIM को 1.55 फीसदी और कांग्रेस को 1.28 फीसदी वोट मिले।
इससे पता चलता है कि 2022 में पयागपुर का मुकाबला मुख्य रूप से BJP और सपा के बीच केंद्रित था। अन्य दलों का वोट शेयर काफी कम रहा।
2027 से पहले क्या कहता है पिछला ट्रेंड?
पिछले तीन चुनावों का रिकॉर्ड किसी एक स्थायी चुनावी पैटर्न की बजाय बदलाव दिखाता है। 2012 में कांग्रेस की जीत हुई, 2017 में BJP ने बड़ी बढ़त के साथ सीट हासिल की और 2022 में BJP ने सीट तो बरकरार रखी, लेकिन मुकाबला पहले से काफी करीबी रहा।
2027 के लिहाज से 2017 और 2022 के बीच जीत के अंतर में आया बदलाव सबसे अहम आंकड़ों में से एक है। हालांकि केवल पिछले चुनावी आंकड़ों के आधार पर अगले चुनाव का नतीजा तय नहीं किया जा सकता।
आने वाले चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, पार्टियों के बीच गठबंधन, संगठन की स्थिति और मतदाताओं का रुख जैसे कई फैक्टर अहम हो सकते हैं। इसके अलावा 2022 के मुकाबले नए राजनीतिक समीकरण भी बन सकते हैं।
पयागपुर में 2027 की लड़ाई किन मुद्दों के इर्द-गिर्द?
पयागपुर जैसे ग्रामीण बहुल विधानसभा क्षेत्र में सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा रह सकते हैं। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं का लाभ और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन सकती है।
हालांकि अभी 2027 के लिए सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों और गठबंधन की अंतिम तस्वीर सामने नहीं है। ऐसे में फिलहाल 2012, 2017 और 2022 के चुनावी आंकड़े ही पिछले राजनीतिक बदलाव को समझने का सबसे ठोस आधार हैं।
कांग्रेस से BJP तक पहुंचा पयागपुर का चुनावी सफर
पयागपुर का पिछला चुनावी इतिहास बताता है कि पिछले एक दशक में यहां राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव हुआ है। 2012 में कांग्रेस के मुकेश श्रीवास्तव ने जीत दर्ज की थी। 2017 में BJP के सुभाष त्रिपाठी ने 41 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त के साथ सीट अपने नाम की। 2022 में उन्होंने दोबारा जीत हासिल की, लेकिन इस बार अंतर 12 हजार से कुछ ज्यादा रहा।
अब 2027 में पयागपुर में पिछली दो विधानसभा चुनावों की कहानी कितनी बदलती है, यह आने वाले समय में उम्मीदवारों, गठबंधन और स्थानीय चुनावी मुद्दों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि 2017 की बड़ी जीत और 2022 के करीबी मुकाबले के बीच का अंतर पयागपुर की 2027 वाली चुनावी कहानी का अहम हिस्सा रहेगा।
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