6वें नवरात्रि पर क्या है शुभ-अशुभ समय? जानें 16 अक्टूबर का पंचांग, तिथि और राहुकाल
Aaj Ka Panchang: पंचांग (16 अक्टूबर 2026): आज की तिथि, नक्षत्र, योग और ग्रहों के गोचर की जानकारी के साथ-साथ जानिए शुभ और अशुभ समय?
16 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार का पंचांग के हिसाब से ज्येष्ठा नक्षत्र के तहत शुक्ल षष्ठी तिथि है। आज छठवां नवरात्र भी है जो मां कात्यायनी को समर्पित है।
जल्दबाजी में किए गए वादों या व्यापक परिवर्तनों के बजाय शांत तैयारी, सावधानीपूर्वक संचार और अनुकूल समय का चुनिंदा उपयोग शामिल है।
पंचांग विवरण
वार: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083 (रौद्र / सिद्धार्थि)
मास एवं पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष
तिथि: शुक्ल षष्ठी (17 अक्टूबर सुबह 05:52 तक,उपरांत सप्तमी)
नक्षत्र: ज्येष्ठा (प्रातः 06:47 तक, उपरांत मूल नक्षत्र)
योग: शोभन (रात्रि 10:06 बजे तक, उपरांत अतिगण्ड योग)
करण: कौलव (सायं 04:38 बजे तक), उपरांत तैतिल करण
परंपरागत पंचांग व्याख्या के अनुसार, शुक्रवार, शुक्ल षष्ठी, ज्येष्ठा और वृश्चिक राशि में चंद्रमा का संयोजन दूसरों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण ध्यान के बीच संतुलन बनाने का आधार प्रदान करता है।
शुक्ल षष्ठी को निरंतर प्रगति के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, जबकि ज्येष्ठी उत्तरदायित्व और प्रभाव के प्रयोग के प्रति विचारशील दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
सूर्य राशि: कन्या राशि
चन्द्र राशि: वृश्चिक राशि (प्रातः 06:47 बजे तक, उपरांत धनु राशि में प्रवेश)। वृश्चिक राशि में चंद्रमा का प्रभाव आत्म-विश्लेषण के लिए एक प्रेरणा का काम करता है, यह मानकर न चलें कि सभी का मन एक जैसा होगा
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: प्रातः 06:22 और सूर्यास्त: सायंकाल 05:50 बजे पर होगा।
आज का शुभ मुहूर्त
आज अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से 12:29 PM तक रहेगा।
अमृत काल: मध्यरात्रि के बाद 2:35 बजे से सुबह 4:23 तक (17 अक्टूबर) रहेगा।
ब्रह्म मुहूर्त: सूबह 04:42 बजे से 05:32 बजे तक रहेगा।
पंचांग मुहूर्त का पालन करने वाले लोग ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:42 से 5:32 बजे तक) का उपयोग शांत मनन, चिंतन या प्रार्थना के लिए कर सकते हैं।
अशुभ समय (राहुकाल एवं दिशाशूल)
राहुकाल: सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक रहेगा।
पंचांग के समय का पालन करने वालों को दोपहर 12:06 बजे समाप्त होने वाले राहु काल को किसी महत्वपूर्ण, विवेकाधीन कार्य को शुरू करने से पहले सावधानी बरतने की अवधि के रूप में देखना चाहिए। विदाल योग शनिवार सुबह 6:23 बजे तक जारी रहता है।
यमगंड काल: दोपहर 03:00 बजे से 04:25 बजे तक रहेगा।
दिशाशूल: पश्चिम दिशा (इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए)। इस अवधि को शांत योजना बनाने, चिंतन करने या प्रार्थना करने के लिए उपयुक्त मानें।
राहु काल के दौरान कोई भी नई शुरुआत करने से बचें। पारंपरिक पंचांग मार्गदर्शन में, आज के समय में सबसे उपयोगी दृष्टिकोण संयमित होना है, न कि प्रतिबंधात्मक।
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