15 अगस्त की आधी रात को ही क्यों मिली भारत को आजादी? माउंटबेटन की ‘लकी डेट’ से जुड़ी है पूरी कहानी
नई दिल्ली: 15 अगस्त 1947 की आधी रात को जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब भारत जीवन और स्वतंत्रता के नए दौर में कदम रख रहा था। लगभग 200 वर्षों की अंग्रेजी हुकूमत के बाद मिली इस आजादी के पीछे लाखों-करोड़ों देशवासियों का त्याग और बलिदान शामिल था। वर्ष 2026 में भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद दिलचस्प है कि अंग्रेजों ने आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख और आधी रात का ही समय क्यों चुना।
माउंटबेटन के लिए खास थी 15 अगस्त की तारीख
ब्रिटिश हुकूमत के आखिरी वायसराय और गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन 15 अगस्त की तारीख को अपने लिए बेहद भाग्यशाली (लकी) मानते थे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 15 अगस्त 1945 को ही जापानी सेना ने अलाइड फोर्सेज के सामने आत्मसमर्पण किया था। उस वक्त माउंटबेटन अलाइड फोर्सेज के कमांडर थे और इस जीत का श्रेय उन्हें मिला था। यही वजह थी कि जब भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की बात आई, तो माउंटबेटन ने 15 अगस्त का दिन ही तय किया।
आखिर आधी रात को ही क्यों चुनी गई आजादी की घड़ी?
15 अगस्त की आधी रात को स्वतंत्रता की घोषणा करने के पीछे कई ऐतिहासिक और राजनीतिक कारण थे, स्वतंत्रता के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान का विभाजन भी तय हो चुका था। ब्रिटिश सरकार और उस दौर के शीर्ष नेताओं को यह अंदेशा था कि अगर दिन के उजाले में आजादी और बंटवारे का ऐलान हुआ, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और भारी दंगे भड़क सकते हैं। इसी प्रशासनिक चुनौती से बचने के लिए आधी रात का वक्त चुना गया।
वायसराय का व्यस्त शेड्यूल
पाकिस्तान को 14 अगस्त को आजादी मिली। लॉर्ड माउंटबेटन को सत्ता हस्तांतरण के सिलसिले में 14 अगस्त को कराची जाना था और फिर उसी देर रात दिल्ली वापस लौटना था। इस वजह से भी आधी रात की समय-सीमा सुविधाजनक मानी गई। आधिकारिक ब्रिटिश दस्तावेजों और तथ्यों के अनुसार, ब्रिटिश सरकार का फैसला था कि भारत और पाकिस्तान दोनों को 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि (जीरो आवर) पर ही एक साथ स्वतंत्रता दी जाएगी। यही कारण रहा कि नई दिल्ली में ठीक आधी रात को भारत की आजादी की ऐतिहासिक घोषणा हुई।
Written by Shailesh Yadav